शेख़ नसीम। भोपाल / मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और पत्रकार निष्पक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। हालांकि, कई बार पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान बाधाओं का सामना करना पड़ता है। एक ओर सरकार “नशे से दूरी है ज़रूरी” जैसे अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक स्थानों पर शराब की दुकानों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों की कवरेज के दौरान यदि पत्रकारों को उनके कार्य से रोका जाए, तो यह चिंता का विषय है।
ऐसा ही एक मामला विकास किरण न्यूज़ चैनल के पत्रकार यूनुस खान के साथ सामने आया। आरोप है कि जब वे रवीन्द्र भवन के पास खुल रही शराब की दुकान की कवरेज करने पहुंचे, तब आबकारी विभाग की एक महिला सब-इंस्पेक्टर ने उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोक दिया। पत्रकार का आरोप है कि महिला सब-इंस्पेक्टर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, एफआईआर कराने की धमकी दी और अखबार का पंजीकरण (RNI) मांगा।

यूनुस खान के अनुसार, उन्होंने अपना प्रेस कार्ड और अखबार का RNI नंबर भी दिखाया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कवरेज करने से रोका गया और कथित रूप से धमकाया जाता रहा।
यदि लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह पत्रकारों की स्वतंत्रता और उनके कार्य में बाधा डालने से जुड़ा गंभीर मामला है। पत्रकारों का कहना है कि वे केवल जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग कर रहे थे और उन्हें अपना कार्य स्वतंत्र रूप से करने दिया जाना चाहिए।
इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भोपाल कलेक्टर तथा आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार को अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोके जाने जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।





