बिलाल खत्री
बड़वानी प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़वानी की प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य के निर्देशन में स्वामी विवेकानन्द करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के माध्यम से कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक्सपोजर विजिट के अंतर्गत बाग़ की गुफाओं, तालनपपुर जैन तीर्थ और दाहोद स्थित नव-निर्मित कष्टभंजन मंदिर का अवलोकन-दर्शन किया तथा अब इस विजिट की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करके उन पर संवाद करने का कार्य प्रारम्भ हो गया है. आज रविवार को भी करियर सेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट निर्माण के कार्य में सक्रिय रहा. बाग़ की गुफाएं एक्सपोजर विजिट के अंतर्गत बाग़ की गुफाओं में पहुँचने पर डॉ. मधुसूदन चौबे और श्रीमती सीमा उपाध्याय ने विद्यार्थियों को बताया कि बाग़ की गुफाएं सैकड़ों साल पहले बनाई गई थीं. ये हमारे देश की महान पुरातात्विक सम्पदा है. इनके माध्यम से हम हमारे पूर्वजों की वास्तुकला में निपुणता को सदियों बाद भी देख और समझ सकते हैं. उस समय निर्माण के साधन सीमित थे तो भी उन्होंने भव्य सृजन किया है. गुफाओं की भित्तियों पर बने उस समय के चित्र और वहां स्थित प्रतिमाएं भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमाण हैं. विन्ध्याचल पर्वत में मूल रूप से कुल नौ गुफाएं थीं. कुछ गुफाएं बंद कर दी गई हैं। गुफा क्रमांक 2, 3, 4 और 5 आज भी बहुत अच्छी स्थिति में हैं. बाग़ की गुफाएं पत्थरों से लिखा महाकाव्य है. यह पांचवीं से सातवीं शताब्दी के दौरान बनी हैं. यहाँ का पूरा परिसर सौन्दर्य से युक्त है. इस विजिट ने हमें अपने अतीत को देखने की नई दृष्टि दी है।
तालनपुर तीर्थ कुक्षी के निकट स्थित तालनपुर जैन तीर्थ में भव्य मंदिर बनाया गया है। इसकी दर्शनीय स्थापत्य कला और वहां के शांत परिवेश ने युवा विजिटर्स को बहुत प्रभावित किया. विजिट के समय रिमझिम वर्षा हो रही थी। जिससे मंदिर क्षेत्र का सौन्दर्य और बढ़ गया. डॉ. महेश लाल गर्ग ने जैन धर्म के इतिहास तथा मंदिर की स्थापत्य कला के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।
कष्टभंजन मंदिर धार जिले के दाहोद ग्राम में सड़क के किनारे स्थित नव-निर्मित भव्य कष्टभंजन मंदिर में यात्रीदल रात्रि के लगभग 8 बजे पहुंचा. वहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु थे. मंदिर में आरती-भजन हो रहे थे। युवाओं ने आध्यात्मिकता की अनभूति की. कमल पाटीदार ने बताया कि आगे चलकर यहाँ अस्पताल तथा विद्यालय का भी निर्माण किया जाएगा. मंदिर की वास्तुकला देखते ही बनती है। देव-प्रतिमाओं की दिव्यता अद्भुत है।
इस एक्सपोजर विजिट में राहुल भंडोले, वर्षा मुजाल्दे, दिव्या जमरे, नागरसिंह डावर, पन्नालाल बर्डे आदि ने सहयोग किया। आगामी दिनों में यात्रा के संस्मरण महाविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के साथ साझा किये जायेंगे, ताकि वे भी भारतीय ज्ञान परम्परा की अमूल्य निधियों और भारत की पुरातात्विक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से अवगत हो सकें।






