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तारा एयर के विमान हादसे के बाद नेपाल ने उठाए सख्त कदम, खराब मौसम में उड़ानों पर लगाई रोक

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नेपाल में खराब मौसम का शिकार बने तारा एयरलाइंस के विमान में सवार सभी 22 लोगों की मौत हो गई। हादसे के दो दिन बाद मंगलवार को आखिरी शव को भी बरामद कर लिया गया है। वहीं, नेपाल ने मंगलवार को उड़ानों के परिचालन के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है। अब विमानन कंपनियों को उड़ान भरने से पहले इस बात पर भी गौर करना होगा कि पूरे रास्ते में मौसम साफ हो।
नेपाल ने यह कदम रविवार को मुस्तांग जिले में हुए विमान हादसे की प्राथमिक जांच के बाद उठाया है। इस जांच के मुताबिक, रविवार को हुए हादसे की मुख्य वजह खराब मौसम थी। अब तक नेपाल का उड्डयन नियामक नेपाल नागरिक विमानन प्राधिकरण (सीएएन) उड़ान शुरू होने के स्थान और गंतव्य पर मौसम साफ होने पर उड़ान भरने की अनुमति देता था। हालांकि, अब से उड़ान के पूरे रास्ते के मौसम पर भी गौर किया जाएगा।
दरअसल, नेपाल एक पहाड़ी हिमालयी देश है। यहां मौसम में बहुत तेजी के साथ और अचानक बदलाव होता है। ऐसे में उचित मौसम पूर्वानुमान प्रणाली के अभाव में उड़ानों का परिचालन मुश्किल है। नेपाल सरकार द्वारा जारी किए गए नए प्रावधान ‘विजुअल फ्लाइट रुल्स’ के तहत सभी उड़ानों पर लागू होगें। सीएएन द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, उड़ान की योजना जमा करने के साथ विमानन कंपनियों को जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दिए गए पूरे रास्ते का मौसम पूर्वानुमान भी जमा कराना होगा।
गौरतलब है कि रविवार को हुए हादसे की प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि कनाडा में निर्मित तारा एयर का विमान खराब मौसम की वजह से बाएं के बजाय दाहिनी ओर मुड़ा जिससे विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस विमान में चार भारतीय, 13 नेपाली और दो जर्मन यात्री थे। इनके अलावा चालक दल के तीन सदस्य भी थे।
नेपाल के पर्वतीय मुस्तांग जिले में विमान दुर्घटना में मारे गये एक भारतीय परिवार के चार सदस्यों की अंत्येष्टि पोस्टमार्टम के बाद यहां पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में की जाएगी। सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। गौरतलब है कि कारोबारी अशोक त्रिपाठी (54), अपनी पत्नी वल्लभी बांडेकर त्रिपाठी (51) अपने बेटे धनुष (22) और बेटी रीतिका (15) के साथ नेपाल की यात्रा पर आये थे। रविवार को हुई विमान दुर्घटना में मारे गये 22 लोगों में वे भी शामिल थे।
भारतीय दूतावास सूत्रों ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को अपने प्रियजनों के शव मिलने के बाद मंदिर परिसर में अंत्येष्टि की जाएगी। यह मंदिर बागमती नदी के तट पर स्थित है। यह नेपाल में सर्वाधिक प्रमुख हिंदू मंदिर है।
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