धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्री
ग्राम पंचायत चिकली वास्केलपुरा में ₹4.25 लाख की CC रोड का मामला, निर्माण नहीं होने के बावजूद सरपंच, सचिव द्वारा पूरी राशि आहरित किए जाने का आरोप ग्रामीणों का।
कुक्षी। ग्राम पंचायत चिकली में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के आहरण और कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर उठे सवालों के मामले में अब शिकायत लोकायुक्त तक पहुंच गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत चिकली के वास्केलपुरा में सीसी रोड निर्माण के लिए ₹4,25,000 की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन मौके पर सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। इसके बावजूद सरपंच श्री बापूसिंह सिसोदिया एवं सचिव श्री रणजीत बघेल द्वारा बिल/वाउचर के माध्यम से पूरी राशि आहरित कर ली गई।
इसके संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पूर्व में SDM कार्यालय में की गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने लोकायुक्त के समक्ष मामला प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
संजय बाबा बघेल का कहना है कि जिन विकास कार्यों के लिए सरकारी राशि स्वीकृत एवं आहरित की गई है, उनके संबंध में मौके पर कार्य की स्थिति और खर्च की गई राशि को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए पंचायत के स्वीकृत कार्य, भुगतान संबंधी दस्तावेज, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका, राशि के आहरण तथा मौके पर हुए निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मामले को लेकर पहले संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत की गई थी। कार्रवाई नहीं होने के बाद अब लोकायुक्त के समक्ष अपनी शिकायत और उपलब्ध दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।
संजय बाबा बघेल ने कहा, “हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करने के लिए नहीं है। हमारी मांग है कि सरकारी राशि और पंचायत के विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच हो। जांच में यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।”
उन्होंने कहा कि पंचायत की सरकारी राशि जनता के विकास के लिए है और उसका उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। वे जांच एजेंसी को उपलब्ध दस्तावेज, शिकायतों और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने तथा जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
मुख्य मांगें
ग्राम पंचायत चिकली के संबंधित विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच हो।
स्वीकृत एवं आहरित राशि का रिकॉर्ड जांचा जाए।
कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए।
बिल-वाउचर एवं माप पुस्तिका सहित संबंधित रिकॉर्ड की जांच हो।
जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।





