खरगोन जिला ब्यूरो इक़बाल खत्री
टोकसर, रावेरखेड़ी और मिटावल में दो-दिवसीय होंगे सांस्कृतिक आयोजन,
निमाड़ी गायन, भगोरिया, गणगौर एवं काठी नृत्य की होंगी मनमोहक प्रस्तुतियां
खरगोन । जिले की समृद्ध लोक एवं जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन खरगोन के सहयोग से ‘खेती खेड़ो हरि नाम की…’ उत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिले के तीन प्रमुख स्थानों टोकसर, रावेरखेड़ी और मिटावल में आयोजित होने वाले दो-दिवसीय कार्यक्रमों में विभिन्न लोक एवं जनजातीय कला विधाओं की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
टोकसर में 6 एवं 7 अक्टूबर को आयोजन
टोकसर स्थित गौमुख घाट में 6 एवं 7 अक्टूबर को सांस्कृतिक आयोजन होगा। 6 अक्टूबर को निमाड़ी गायन, नर्मदाष्टकम् नृत्य-नाटिका, काठी नृत्य एवं भील जनजातीय भगोरिया नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी। वहीं 7 अक्टूबर को ‘खेती खेड़ो हरि नाम की…’ नृत्य-नाट्य का मंचन किया जाएगा।
रावेरखेड़ी में 8 एवं 9 अक्टूबर को लोक रंग
रावेरखेड़ी स्थित श्रीगौरी अन्नक्षेत्र आश्रम में 8 एवं 9 अक्टूबर को आयोजन होगा। प्रथम दिवस निमाड़ी गायन, निमाड़ी गम्मत, भील जनजातीय भगोरिया नृत्य एवं गणगौर नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी। दूसरे दिन ‘खेती खेड़ो हरि नाम की…’ नृत्य-नाट्य का मंचन किया जाएगा।
मिटावल में 12 एवं 13 अक्टूबर को होगा आयोजन
मिटावल स्थित संत सिंगाजी मंदिर परिसर में 12 एवं 13 अक्टूबर को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। 12 अक्टूबर को निमाड़ी गायन, नर्मदाष्टकम् नृत्य-नाटिका एवं गणगौर नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। 13 अक्टूबर को ‘खेती खेड़ो हरि नाम की…’ नृत्य-नाट्य का मंचन होगा।
इस नृत्य-नाट्य के निर्देशक चंद्रमाधव बारिक, भोपाल, लेखक योगेश त्रिपाठी, रीवा तथा संगीतकार कुलदीप सारवा, दुर्ग हैं। आयोजन के माध्यम से जिले की लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं को मंच प्रदान करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।





