शेख़ नसीम। भोपाल / राजधानी भोपाल के भोपाल-उत्तर विधानसभा क्षेत्र के नारियलखेड़ा स्थित फिज़ा कॉलोनी में प्रशासन द्वारा मकानों को तोड़े जाने की कार्रवाई से रहवासियों में हड़कंप मच गया। फिज़ा कॉलोनी में करीब 40 अवैध मकान बताए जा रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि यदि मकानों को तोड़ा गया तो लगभग 40 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो जाएगा।
प्रशासन की कार्रवाई को लेकर कॉलोनी के रहवासियों में खासा गुस्सा, नाराज़गी और विरोध देखने को मिला। रहवासियों का कहना है कि वे पिछले करीब 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने मकान खरीदे हैं, किसी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं किया। इसके बावजूद उनके मकानों को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।
रहवासियों ने कहा कि वे नियमित रूप से संपत्तिकर, जलकर और बिजली के बिल का भुगतान करते आ रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अचानक मकान तोड़ने की कार्रवाई समझ से परे है। उनका आरोप है कि कई बार रात में नोटिस दिया जाता है और अगले ही दिन सुबह मकान तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
रहवासियों ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर यह कैसा न्याय है? बारिश के मौसम में यदि उनके सिर से छत छिन जाएगी तो वे अपने परिवार और छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएंगे। लोगों ने सरकार से मानवीय आधार पर तत्काल कार्रवाई रोकने की मांग की है।
नारियलखेड़ा के रहवासियों ने सरकार से मांग की है कि मकान तोड़ने से पहले उन्हें कम से कम 6 महीने का समय दिया जाए, ताकि वे अपने रहने की वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें। साथ ही उन्होंने मांग की है कि प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह नए मकान उपलब्ध कराए जाएं।
रहवासियों का कहना है कि वे सरकार के विकास कार्यों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वर्षों से बसे परिवारों को अचानक बेघर करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मामले में पुनर्विचार कर प्रभावित परिवारों को राहत देने की अपील की है।





