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राष्ट्रीय साइबर क्राइम जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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बिलाल खत्री
बड़वानी शासकीय कन्या महाविद्यालय बड़वानी में राष्ट्रीय साइबर क्राइम जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ। प्राचार्य डॉ. कविता भदौरिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग, सोशल मीडिया और ऑनलाइन लेन-देन के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी समान रूप से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग विवरण और पासवर्ड जैसी संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित रखना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से यह भी बताया कि अज्ञानता, लापरवाही और डर साइबर ठगी का मुख्य कारण बनते हैं। केवाईसी अपडेट, लॉटरी, डिजिटल अरेस्ट, व्हाट्सएप लिंक, स्कॉलरशिप मैसेज या एपीके फाइल डाउनलोड के बहाने साइबर अपराधी लोगों को जाल में फंसा लेते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक पर प्रतिक्रिया न दें और हमेशा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करें। साथ ही, सावधानी ही सुरक्षा है का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि यह डिजिटल जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे स्वयं जागरूक रहें और दूसरों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें ताकि एक सुरक्षित डिजिटल समाज का निर्माण हो सके।

विशेष वक्ता पुलिस विभाग के ज्ण्प्ण् दिनेश सिंह कुशवाह ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में अपराध के तरीके बदल गए हैं, इसलिए प्रत्येक नागरिक को साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड, फेक कॉल, लॉटरी स्कैम, सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग आदि के आधुनिक तरीकों से अवगत कराया तथा ऐसे मामलों से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए।

कार्यक्रम के अंतर्गत उन्होंने नशा मुक्ति अभियान, मुस्कान अभियान तथा यौन उत्पीड़न से सुरक्षा जैसे सामाजिक अभियानों की जानकारी भी दी और बताया कि इन अभियानों का उद्देश्य को प्रबल बनाना है। इन अभियानों का उद्देश्य युवाओं में सजगता एवं आत्मरक्षा की भावना को प्रबल बनाना है। उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं को यह भी बताया कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति या अपराध संबंधी शिकायत के लिए नागरिक साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, महिला हेल्पलाइन 1091, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, तथा पुलिस नियंत्रण कक्ष 112 पर तुरंत संपर्क कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान पुलिस एवं महाविद्यालय परिवार के बीच जनसंवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज को अपराध, नशा एवं साइबर ठगी से मुक्त करने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य वक्ता सायबर सेल प्रभारी रितेश खत्री उप निरीक्षक ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के युग में डिजिटल अज्ञानता सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है। साइबर अपराधी अब एपीके फाइल, व्हाट्सएप मैसेज, नकली निमंत्रण लिंक, स्कॉलरशिप संदेश आदि माध्यमों से मोबाइल हैक कर रहे हैं और नागरिकों की निजी जानकारी का दुरुपयोग कर रहे हैं। मुख्य वक्ता ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसी नई ठगी तकनीकों के माध्यम से अपराधी लोगों को डराकर उनसे पैसे ऐंठ रहे हैं। आम नागरिकों को यह समझना चाहिए कि केवाईसी अपडेट, बैंकिंग जानकारी, या ऑनलाइन फॉर्म अपडेट जैसे संदेशों के नाम पर ठगी की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति अनजाने लिंक पर क्लिक न करें और किसी अज्ञात व्यक्ति को ओटीपी या बैंक डिटेल्स साझा न करें। उन्होंने बताया कि कई लोग डर, लाचारी और लापरवाही के कारण ठगों के जाल में फंस जाते हैं। अपराधी इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर लोगों से बड़ी रकम हड़प लेते हैं। इसलिए नागरिकों को सतर्क, जागरूक और आत्मविश्वासी बनना होगा। मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को समझाया कि साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की तुरंत शिकायत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, पुलिस नियंत्रण कक्ष 112, याwww.cybercrime.gov.in पर की जा सकती है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि अज्ञानता अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार है, इसलिए ज्ञान और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. दीपाली निगम ने किया एवं आभार डॉ. प्रियंका देवड़ा ने माना।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एन.एल. गुप्ता, डॉ. स्नेहलता मुझाल्दा, डॉ. मनोज वानखेड़े, डॉ. महेश कुमार निंगवाल, डॉ. दिनेश सोलंकी, डॉ. प्रियंका देवड़ा, प्रो. सीमा नाईक, डॉ. इन्दु डावर, डॉ. स्मिता यादव, प्रो. दीपक सोलंकी, प्रो. लीना वास्कले, डॉ. लखन कुमार परमार, डॉ. अंकिता पागनिस, प्रो. पवन कुमार सिंह, प्रो. अलका तोमर, प्रो. सीमा भाटिया, प्रो. सोनाली जोशी, प्रो. आयुषी व्यास, प्रो. प्रियंका शर्मा, प्रो. प्रियंका शाह एवं अमृता यादव डॉ. राकेश ठाकरे, प्रो. मनोज डुडवे, एवं छात्राएँ उपस्थित थी ।

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