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मंत्री धनंजय मुंडे को पड़ा दिल का दौरा, ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती

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महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री और राकांपा नेता धनंजय मुंडे की हालत में सुधार पर है। मंगलवार रात तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार सुबह महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि, चिंता करने वाली कोई बात नहीं है। शाम तक धनंजय मुंडे को आईसीयू से शिफ्ट कर दिया जाएगा। उन्हें दौरा नहीं पड़ा था। बेहोश होने के कारण वह बेसुध हो गए थे। 
दरअसल, तबीयत बिगड़ने के बाद मुंडे को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान खबर आई थी कि, धनंजय मुंडे को माइनर अटैक आया था। इसके बाद महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे अस्पताल पहुंचकर मुंडे से मुलाकात की थी।
धनंजय मुंडे, दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं। उन्होंने अपने सियासी करियर की शुरुआत भाजपा की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथ की थी। साल 2012 में उन्होंने भाजपा छोड़ दी और एनसीपी से जुड़ गए। 2014 में उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। उसी साल उन्होंने विधानसभा का चुनाव भी लड़ा लेकिन अपनी चचेरी बहन और गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा से चुनाव हार गए।2019 में बीड की परली सीट से उनका मुक़ाबला फिर एक बार पंकजा मुंडे से हुआ और इस बार वे चुनाव जीत गए।
अपनी बहन के खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कथित तौर पर एक ऐसा बयान दिया जिससे विवाद खड़ा हो गया था। उनके बयान का वीडीयो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद भाजपा के एक नेता ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी। मुंडे के खिलाफ मानहानि और महिला से अभद्र व्यवहार का मामला दर्ज किया गया था। चुनाव आयोग से भी इस मामले की शिकायत की गयी था।हालांकि धनंजय मुंडे ने वीडियो  पर सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान के साथ छेड़छाड़ हुई है और वीडीयो को एडिट किया गया है।
मुंडे पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और डराने धमकाने का आरोप लगाया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था। हालांकि विवाद के बारे में मुंडे ने आरोप लगाने वाली महिला की बहन के साथ अपने रिश्ते की बात स्वीकार की थी। उनका कहना था कि उसके बच्चों को उन्होंने अपना नाम भी दिया है। 
चुनाव जीतने के बाद उन्हें महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। मुंडे उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के करीबी माने जाते हैं। साल 2019 में जब एक दिन सुबह-सुबह अजीत पवार ने पार्टी  से बगावत करके देवेंद्र फड़नवीस के साथ मंत्रिपद की शपथ ले ली थी तब उस साजिश में धनंजय मुंडे की भी अहम भूमिका बताई गई थी।
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