जनसम्पर्क खबर : क्राइम ब्यूरो चीफ रफीक मंसूरी खरगोन
खरगोन। निजी अस्पतालों की मनमानी और लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है। पटेल नगर स्थित खुशी अस्पताल में रविवार रात इलाज के लिए पहुंचे एक बच्चे को समय पर डॉक्टर नहीं मिला। आरोप है कि ड्यूटी डॉक्टर ने फोन पर ही इलाज लिख दिया। इसके बाद अस्पताल की मेडिकल दुकान पर दवाई लेने गई महिला और उसके पति से दुकानदार ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दे डाली। पीड़ित परिवार की शिकायत पर जैतापुर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैँ। प्राप्त जानकारी अनुसार बजरंग नगर जैतापुर निवासी उषा बाई ने बताया कि वह अपने बेटे अजीत की तबियत ख़राब होने पर 12 जुलाई रविवार रात करीब 11:30 बजे खुशी अस्पताल पटेल नगर लेकर पहुंची थी।
पीड़िता का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर वहां बच्चों का कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसके बावजूद ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने किसी अन्य डॉक्टर से फोन पर बात करके पर्ची पर दवाइयां लिख दीं और उन्हें मेडिकल दुकान से दवा लाने को कह दिया।उषा जब अस्पताल परिसर में ही संचालित मेडिकल दुकान पर दवाई लेने पहुंची तो वहां बैठे एक युवक ने उन्हें करीब 20 मिनट तक बैठाए रखा। बार-बार पूछने पर भी उसने दवाई नहीं दी और कहा यहां दवाई नहीं मिलेगी, अन्य अस्पताल से ले लो।
इसी बात को लेकर जब उषा और उनके पति ने देर तक बिठाने और दवाई न देने का कारण पूछा तो दुकान पर बैठा युवक आग बबूला हो गया। आरोपी ने दोनों पति-पत्नी को मां-बहन की अश्लील गालियां दीं। जब पति ने कहा कि दवाई नहीं है तो हम कहीं और दिखा लेंगे, तो आरोपी उन्हें मारने के लिए दौड़ा। अस्पताल स्टाफ ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। जाते समय आरोपी ने धमकी दी कि आज के बाद अगर मेरी दुकान पर आए तो तुम दोनों को जान से मार दूंगा। बाद में अन्य स्टाफ से पूछने पर आरोपी की पहचान राजू यादव निवासी निमगुल के रूप में हुई। इस पूरे घटनाक्रम से आहत होकर उषा ने थाना जैतापुर पहुंच कर एफ आई आर दर्ज करवाई हैँ ।मिली जानकारी अनुसार पीड़िता के आवेदन और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी राजू यादव के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं में एफ आई आर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। इसमें अस्पताल में डॉक्टर की अनुपस्थिति, फोन पर इलाज लिखे जाने और मेडिकल दुकान के लाइसेंस की भी जांच की जाएगी। थाना प्रभारी ने कहा मामले को गंभीरता से लिया गया है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में खुशी अस्पताल के प्रति नाराजगी है। लोगों का कहना है कि रात के समय इमरजेंसी में डॉक्टर का न होना और स्टाफ का इस तरह का व्यवहार मरीजों की जान से खिलवाड़ है। कई लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की जांच कराने की मांग की है।





