बिलाल खत्री
आलीराजपुर, वर्षा नहीं होने से जिले के किसान लोगों हो रहें हैं परेशान, जिले में अभी बोवनी भी पूरी नहीं हुई है, किसानों ने महंगा बीज खाद खरीद कर बोवनी प्रारंभ की है, परंतु बारिश नहीं हो रही हैं। किसानों ने जयस जिला अध्यक्ष अरविंद कनेश के नेतृत्व में तहसील आलीराजपुर के ग्राम भानारावत, कवछू, बोराना, चौंगलावद, सेजा, खण्डाला, बड़ा उण्डवा एवं छोटा उण्डवा सहित आसपास के गांवों के किसानों ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर नर्मदा लिफ्ट इरिगेशन (उद्वहन सिंचाई) परियोजना का पानी तत्काल छोड़े जाने की मांग की।

किसानों ने ज्ञापन में बताया कि उन्होंने समय पर सोयाबीन, कपास, मक्का और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुवाई की थी। शुरुआती बारिश के बाद पिछले कई दिनों से वर्षा नहीं होने के कारण खेतों की नमी समाप्त हो गई है और फसलें मुरझाने लगी हैं। यदि शीघ्र सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो हजारों किसानों की फसलें नष्ट होने का खतरा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ज्ञापन में बताया गया कि क्षेत्र में नर्मदा लिफ्ट इरिगेशन परियोजना की नहर एवं पाइप लाइन उपलब्ध है।
यदि परियोजना का पानी तत्काल छोड़ा जाता है तो किसानों की फसलों को समय पर सिंचाई मिल सकेगी और सूखे की स्थिति से राहत मिलेगी।
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की कि संबंधित विभाग नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) को तत्काल निर्देशित कर परियोजना का पानी शीघ्र छोड़े, ताकि क्षेत्र के किसानों की फसलें बचाई जा सकें।
इस अवसर पर किसानों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर अपनी मांग का समर्थन किया। ज्ञापन सौंपने के दौरान जयस जिला अध्यक्ष अरविंद कनेश के साथ अरविंद सिंह (कवछू), मुन्ना रावत (कवछू), भगवान (बोराना), वेल्या बछाल (कवछू), प्रवीण सिंह (बोराना), सुरेश (सेजा), रतन (कवछू), मालू किराड़ (कवछू), वेला किराड़ (कवछू), सुरजभान (बोराना), सुनील (बोराना), किरण (चौंगलावद), विश्वंभर (चौंगलावद), दिलू (बड़ा उण्डवा), रमेश (सेजा), दशरथ (खण्डाला), राहुल (खण्डाला), सुरपाल (बोराना), मुकलिया (बड़ा उण्डवा), धावर सिंह (बड़ा उण्डवा), सुखलाल (उण्डवा), बाला सिंह (बड़ा उण्डवा), काला सिंह (छोटा उण्डवा), बाबू (कवछू) सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
किसानों ने प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर नर्मदा परियोजना का पानी छोड़ने की मांग की, ताकि सूखे की मार झेल रही खरीफ फसलों को बचाया जा सके।





