टोंकखुर्द। स्थानीय एसडीम कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में कुल चार आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से दो मामले ऐसे आए जो प्रशासनिक ढर्रे और लेती-लतीफी की पोल खोलते हैं। पीड़ित सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। मामलों की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम रितु चौरसिया ने आवेदकों को जल्द से जल्द निराकरण का आश्वासन दिया है।
मामला 1: पटवारी की लापरवाही या ऑनलाइन गड़बड़ी ? सालों से सीमांकन को भटक रहे किसान
अगरोद पंचायत का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ राजस्व विभाग की तकनीकी त्रुटि का खमियाजा किसान भुगत रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद: पीड़ित किसानों का कहना है कि उनके पुराने नक्शे में दर्ज नंबर 352 की जगह ऑनलाइन रिकॉर्ड में 782 का नक्शा बना दिया गया है।
पटवारी का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: जब पीड़ित किसान मांगीलाल पटवारी से मिले, तो पटवारी ने ऑनलाइन गड़बड़ी का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया। पटवारी ने कहा कि ‘आप दोनों (नए और पुराने) नक्शों की नकल निकालकर लाओ, हम फिर से सीमांकन कर देंगे।’ लेकिन किसान नकल लेकर भटकते रहे और आज तक सीमांकन नहीं हुआ।
सालों का इंतजार: आज जनसुनवाई में मांगीलाल, रमेश और सेवाराम (पिता समदर सिंह) ने अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसान इसी तरह सालों तक सरकारी दफ्तरों की चौखट घिसता रहेगा?
मामला 2: रिटायर्ड शिक्षक की निजी भूमि पर ग्राम पंचायत का ‘अवैध कब्जा’
दूसरा गंभीर मामला जिरवाइ के हिम्मत सिंह का है, जो पेशे से एक सरकारी शिक्षक रहे हैं। अपनी सेवा पूरी करने के बाद जब वे अपने गांव लौटे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
अवैध कब्जे की कहानी: हिम्मत सिंह जब अपनी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद अपनी जन्मभूमि ग्राम पंचायत जिरवाई में मकान बनाने पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उनकी निजी भूमि पर ग्राम पंचायत जिरवाई द्वारा ही अवैध कब्जा कर लिया गया है।
मकान निर्माण पर रोक: पीड़ित शिक्षक जब भी अपनी जमीन पर मकान बनाने का प्रयास करते हैं, ग्राम पंचायत द्वारा काम रुकवा दिया जाता है।
4 साल से न्याय का इंतजार: हिम्मत सिंह पिछले 4 वर्षों से जगह-जगह आवेदन दे रहे हैं, लेकिन नतीजा सिफर रहा। आखिरकार आज उन्होंने टोंकखुर्द जनसुनवाई में अपनी गुहार लगाई।
एसडीएम का आश्वासन
जनसुनवाई में आए इन दोनों ही गंभीर मामलों को सुनने के बाद एसडीएम रितु चौरसिया ने पीड़ितों को ढांढस बंधाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि इन दोनों समस्याओं की बारीकी से जांच की जाए और आवेदकों की समस्याओं का जल्द से जल्द (समय सीमा में) निराकरण करवाया जाए।
अब देखना यह होगा कि जनसुनवाई के इस आश्वासन के बाद सालों से परेशान इन ग्रामीणों को कब तक न्याय मिल पाता है।





