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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा 50 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत भूमि प्रतिफल करने से खुले इंदौर-पीथमपुर इकोनोमिक कॉरिडोर परियोजना के सफलता के रास्ते

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धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्री

इंदौर-पीथमपुर इकोनोमिक कॉरिडोर परियोजना क्षेत्र के समग्र औद्योगिक विकास के साथ-साथ स्थानीय भू-स्वामियों एवं किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने जा रही है। 75 मीटर चौड़ी, 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर में विकसित होने वाली इस परियोजना जिसमें 1300 हेक्टेयर से अधिक भूमि शामिल है तथा इसकी परियोजना लागत 2360 करोड़ है। यह परियोजना न केवल क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करेगी, बल्कि भूमि देने वाले किसानों को प्रत्यक्ष एवं दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी सुनिश्चित करेगी।
इस परियोजना में शामिल भूमि के विकास की सबसे बड़ी चुनौती थी आपसी सहमति से भू-स्वामियों से भूमि प्राप्त करना क्योंकि परियोजना में शामिल भूमि शहर के समीप होने से यहाँ की भूमि का बाजार मूल्य अधिक है।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस वास्तविक समस्या को समझा गया एवं कृषकों के हित में तत्काल निर्णय लेते हुए भू-स्वामियों को उनके द्वारा समर्पित की गई भूमि के प्रतिफल के रूप में मिलने वाली भूमि को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है। यह निर्णय किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है और उन्हें इस योजना में स्वेच्छा से अपनी भूमि देने के लिए प्रेरित कर रहा है।


योजना के प्रथम चरण का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कर कमलों द्वारा भूमि पूजन का कार्यक्रम 03 मई 2026 को दोपहर 12:00 बजे सेक्टर-ए, इन्दौर पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरीडोर, ग्राम नैनोद, इन्दौर में आयोजित किया जा रहा है। इस प्रथम चरण की लागत 326.51 करोड है।
विकसित भूमि के रूप में मुआवजा मिलने से भू-स्वामियों को भविष्य में अधिक मूल्य प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, इस विकसित भूमि का उपयोग वे आवासीय, वाणिज्यिक अथवा अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी।


परियोजना के अंतर्गत आधुनिक अधोसंरचना, बेहतर कनेक्टिविटी, निवेश एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को भी लाभ मिलेगा। इससे क्षेत्र का समग्र सामाजिक एवं आर्थिक विकास सुनिश्चित होगा।


जिला प्रशासन एवं एमपीआईडीसी के अधिकारियों द्वारा भी भू-स्वामियों से सतत संवाद स्थापित कर उन्हें योजना के लाभों के बारे में अवगत कराया जा रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और किसान इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रहे हैं।

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