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पारंपरिक वेषभूषा, आभूषण और मांडल की थाप में रचा-बसा भगोरिया उत्सव

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आलीराजपुर जिले के उदयगढ़ के स्थानीय भगोरिया पर्व में हुए शामिल

भव्य स्वागत, मंच से संबोधन और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

बिलाल खत्री
आलीराजपुर, 27 फरवरी 2026। फाल्गुन मास के रंगों, मांडल की थाप और जीवन-प्रेम की उमंग से सराबोर भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति, सामाजिक स्नेह और परंपरागत जीवन मूल्यों का जीवंत उत्सव है। पर्व स्थल पर पारंपरिक लोकधुनों, नृत्य और उल्लासपूर्ण वातावरण ने सम्पूर्ण क्षेत्र को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
आलीराजपुर जिले के उदयगढ़ में आयोजित स्थानीय भगोरिया पर्व में डॉ. मोहन यादव की सहभागिता से उत्सव का उल्लास और अधिक बढ़ गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कलेक्टर नीतू माथुर, अन्य प्रशासनिक अधिकारियों, जनजातीय समाज एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया।

 मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का मंत्री अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागरसिंह ने जनजातीय संस्कृति के प्रतीक तीर कमान भेंट किया। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पुष्पगुच्छ से स्वागत किया गया। मंत्री  द्वारा मंच से सभी को राष्ट्रीय पर्व भगोरिया की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि 28 गांवों के अंदर मां नर्मदा का जल पहुंचने के लिए सर्वे करने की जो मांग रखी थी वह मंजूर की गई। उन्होंने यह भी कहा कि आज जननायक चंद्रशेखर की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके स्मृति स्थल भाबरा जाने का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे हम गौरांवित हुए। 

 भगोरिया उत्सव में जनजातीय युवक-युवतियां रंग-बिरंगी पारंपरिक वेषभूषा में सजे-धजे दिखाई दिए। पुरुष वर्ग पारंपरिक धोती, अंगोछा एवं साफा धारण किए हुए थे, जबकि महिलाएं कांचली, घाघरा, ओढ़नी तथा पारंपरिक कढ़ाईयुक्त परिधानों में सुसज्जित रहीं। चांदी के हार, हांसली, कड़े, पायल, बिछिया एवं अन्य पारंपरिक आभूषणों की झंकार ने पर्व की शोभा और आकर्षण को और बढ़ाया।

  मांडल, ढोल एवं अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर कुर्ता कुर्राटियों के साथ लोकनृत्य करते जनजातीय समाज, सामूहिक उल्लास और आपसी मेल-जोल ने भगोरिया के माहौल को जीवंत एवं स्मरणीय बना दिया।

  इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मंच के माध्यम से सभा को संबोधित किया गया। उन्होंने कहा कि भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

  विरासत को विकास की राह पर ले जाने के संकल्प के साथ इस उल्लासमय पर्व को गरिमा और भव्यता के साथ मनाया गया। यह आयोजन जनजातीय संस्कृति की सशक्त पहचान और राज्य सरकार की संवेदनशील सोच को प्रतिबिंबित करता है।

  इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, पूर्व सांसद गुमानसिंह डामोर, पूर्व विधायक  माधोसिंह डावर, विशाल रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, संभागायुक्त इंदौर डॉ सुदाम खाड़े, कलेक्टर  नीतू माथुर, पुलिस अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारीगण, स्थानीय नागरिक तथा बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे। सम्पूर्ण क्षेत्र में उत्सव, उल्लास और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण व्याप्त रहा

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