कलेक्टर नेहा मीना ने किया कार्यशाला का शुभारंभ, प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ‘चार चरणों’ के महत्व को समझाया
झाबुआ। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित जिला आपदा प्रबंधन क्षमता वृद्धि कार्यशाला का भव्य शुभारंभ कलेक्टर नेहा मीना द्वारा किया गया। माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुई इस कार्यशाला का मुख्य केंद्र अग्नि एवं विस्फोट जैसी आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव की तकनीक रहा।

आपदा प्रबंधन के चार प्रमुख चरण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर नेहा मीना ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल एक घटना का जवाब नहीं, बल्कि एक सतत और समन्वित प्रक्रिया है। उन्होंने इसके चार प्रमुख स्तंभों— मिटिगेशन (न्यूनिकरण), प्रिपेयर्डनेस (तैयारी), रिस्पॉन्स (प्रतिक्रिया) और रिकवरी (पुनर्प्राप्ति) पर जोर देते हुए कहा कि इन चरणों के सही क्रियान्वयन से आपदा के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।
शिक्षण संस्थानों तक पहुँचेगी ट्रेनिंग कलेक्टर ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में तैयार करना है। ये ट्रेनर भविष्य में कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराएंगे। उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वे आगामी 20 तारीख को होने वाले व्यवहारिक प्रदर्शन (डिमॉन्स्ट्रेशन) को गंभीरता से सीखें। कलेक्टर ने आगामी दो महीनों में जिले भर में विकेंद्रीकृत (Decentralized) कार्यशालाओं और नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश भी दिए।

फर्स्ट रिस्पॉन्डर की सतर्कता है जरूरी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिपाल सिंह महोबिया ने कहा कि फील्ड में किसी भी आपात स्थिति में सबसे पहले पहुँचने वाले ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निर्णायक होती है। उन्हें पता होना चाहिए कि सुरक्षित और त्वरित कार्रवाई कैसे की जाए।





