बिलाल खत्री
इंदौर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 10 अक्टूबर को लखनऊ की ऐतिहासिक सफेद बारादरी में आयोजित क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी का द्वीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और क्राफ्टरूट की संस्थापक अनारबेन पटेल भी उपस्थित रहीं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मध्य प्रदेश के धार जिले के बाग गाँव से आए प्रसिद्ध बाग प्रिंट शिल्पकार मोहम्मद आरिफ खत्री एवं मोहम्मद अली खत्री से विशेष रूप से मुलाक़ात की और उनकी पारंपरिक कला के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बाग प्रिंट की जटिल प्रक्रिया को बड़े ध्यान से समझा। खत्री ने उन्हें बताया कि बाग प्रिंट एक प्राचीन हस्तकला है, जो पूरी तरह हाथ से की जाती है। इसमें कपास और रेशम के कपड़ों पर लकड़ी के ब्लॉकों से छपाई की जाती है, और प्राकृतिक रंगों, पौधों, फूलों और जड़ों से बने रंगों का उपयोग होता है। बाग क्षेत्र की विशिष्ट नदी का पानी इन रंगों को और गहराई तथा चमक प्रदान करता है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने खत्री के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पारंपरिक कलाएँ भारत की असली पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी को इन कलाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
यह क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी लखनऊ में 10 से 14 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से आए नामी शिल्पकार अपने विशिष्ट हस्तशिल्प, वस्त्र और कलाकृतियों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
मोहम्मद आरिफ खत्री, जो यूनेस्को और वर्ल्ड क्राफ्ट्स काउंसिल द्वारा ‘अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस’ से सम्मानित हैं, बाग प्रिंट की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख शिल्पकारों में से एक हैं। यह कला उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है। उनके पिता अब्दुल कादर खत्री भारत सरकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हैं, और बाग प्रिंट कला को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में उनका बड़ा योगदान रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि उनके द्वारा बनाए गए उत्कृष्ट बाग प्रिंट उत्पाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किए गए हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री ने विशेष अवसरों पर धारण भी किया है। इस सम्मान ने बाग प्रिंट को देशभर में नई प्रतिष्ठा दिलाई है।






