खरगोन जिला ब्यूरो इक़बाल खत्री
सोयाबीन उत्पादकों को मिलेगा 5328 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य का लाभ
खरगोन । कलेक्टर भव्या मित्तल ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कक्ष से वी.सी. के माध्यम से भावांतर योजना के बेहतर क्रियांवयन के संबंध में समीक्षा की। इस दौरान एडीएम रेखा राठौर, सीईओ जिला पंचायत आकाश सिंह सहित कृषि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही वी.सी. के माध्यम से एसडीएम जुड़े। कलेक्टर ने एसडीएम को निर्देश दिए कि सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए म.प्र. सरकार द्वारा भावांतर भुगतान योजना शुरू की गई है। जिसका क्रियान्वयन सही ढंग से हो और किसानों को लाभ मिले। कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि किसानों की फसल मंडियों में किसान ही बेंचे, कोई भी व्यापारी किसानों के नाम पर फसल न बेचें। एसडीएम को ब्लॉक स्तर पर जनप्रतिनिधियों, मंडी सचिवों, कृषि, मार्कफेड, नान आदि अधिकारियों, किसान संगठनों एवं लाइसेंसी व्यापारियों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए। साथ ही योजना का पंचायत स्तर पर प्रचार प्रसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहां इस योजना के लाभ की जानकारी देने के लिए शासकीय कार्यालय, पंचायत भवनों आदि में पेम्पलेट चस्पा कराएं। इस योजना में 03 अक्टूबर से उपार्जन पंजीयन एवं 24 अक्टूबर से सोयाबीन फसल खरीदी होगी। उन्होंने कहां किसानों के रकबे का सत्यापन राजस्व विभाग की टीम करेगी और हर मंडी के लिए नोडल अधिकारी भारसाधक अधिकारी एवं नोडल एसडीएम रहेगे। उन्होंने योजना की निरंतर समीक्षा करने के निर्देश देते हुए कहां कि वास्तविक किसानों को ही योजना का लाभ मिले, व्यापारियों को नहीं। सोयाबीन का उत्पादन करने वाले किसानों को फसल विक्रय करने पर 5328 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा। जिस क्षेत्र में सोयाबीन की पैदावार अधिक है वहां विशेष फोकस कर योजना के लाभ से किसानों को अवगत कराएं। पारदर्शिता के लिए मंडियों में व्यापारियों को बोली लगाने के निर्देश दिए। साथ ही पूरी खरीदी की वीडियोग्राफी कराने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा एफएक्यू ग्रेड की सोयाबीन खरीदते समय मापदंडों का पालन सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने मंडीवार नोडल अधिकारी एवं समिति का गठन करने के निर्देश दिए।
कम दर पर बिके लॉट की जांच व्यवस्था पिछले दिन के मॉडल रेट की तुलना में जो लॉट कम दर पर बिके हों, उनका नमूना संरक्षित किया जाए और यह जांच की जाए कि वह लॉट एफएक्यू ग्रेड का है या नहीं प्रत्येक मंडी में इसके लिए एक स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।






