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इनकी बा वकार शायरी और बुलंद आवाज़ इन्हें दूसरों से अलग पहचान दे गई

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धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्री

हाजी अब्दुल शाकिर शेख बुंदेली का जाना बड़वानी ऊर्दू अदब के सौबे में एक बड़ी कमी दे गया….कहते हैं पुत के पांव पालने में नज़र आते हैं और साथ ही ये भी के विरासत को यदि सही हाथ मिल जाए तो वो बुजुर्गों की तंजीम को बुलंद मकाम अता कर देती हैं। कुछ इसी तरह का एक बुलंद नाम शहर ए बड़वानी के लिए उर्दू,अदब और साहित्य के क्षेत्र में हाजी अब्दुल शाकिर शेख बुंदेली का रहा है ।

आपकी प्रारंभिक तालीम बड़वानी में हुई और कॉलेज स्तर तक का सफर भी यही पूरा किया । स्कूल, कॉलेज के दौर से ही आपने अपनी लेखन कला और मंच संचालन से लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली थी,पिता अब्दुल लतीफ शेख बुंदेली और भाई हाजी जाकिर शेख,हाजी सादिक शेख, नासिर शेख के साथ चचेरे भाई हाजी सलीम शेख,हाजी कदीर शेख के साथ आपने ऊर्दू अदब में अपनी शायरी से नई पहचान बनाई ।

शासकीय नौकरी में शिक्षक के तौर पर के राजपुर साथ बड़वानी की शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 में अपनी सेवाएं इतिहास विषय के उच्च श्रेणी शिक्षक के तौर पर दी, यहां पर आपके द्वारा किए गए स्काउटिंग के कार्य को पूरे प्रदेश और फिर राष्ट्रीय स्तर पर भी पुरस्कार मिले । मंच से आपका विशेष लगाव हमेशा रहा जिसके फलस्वरूप आपके गुरु की तरह रहे उर्दू शायर चाचा अजीज शेख बुंदेली और राजपुर की उर्दू अदब की बड़ी शख्शियत हाजी नईम कुरैशी के साथ मिलाद ए पाक पढ़ने का सफर शुरू किया ।

साल दर साल इस मिलाद और मजलिस की अदबी महफिलों की आप प्रमुख कड़ी बन गए,साथ ही आपकी लिखी हुई हम्द, नात ए पाक और शहीदाने करबला की शान में लिखे मर्सिए लोगों के दिलों को नई ताज़गी देने का जरिया बने । आपकी लिखी मौतबर किताब शहीदे करबला आपकी विशेष पहचान है। सात भाई ताजिया ग्रुप, फ़रोग ए अदब कमेटी और बडवानी मिलाद पार्टी आपके वो प्रमुख ग्रुप है जिसकी आप हमेशा रीढ़ रहे । आप ने लिखा भी बहुत, पढ़ा भी बहुत और अल्लाह ने उसी की बदौलत आपको हज और करबला की जियारत का अवसर भी प्रदान किया । 2 वर्ष से आप एक लंबी बीमारी से संघर्ष के बाद दुनियाएं फानी से 11 जुलाई,शुक्रवार को अलविदा कह गए । गौर करने वाली बात थी कि आप हमेशा चाह रखते थे कि अल्लाह मुझे माहे मोहर्रम में अपने पास बुलाए, और शायद उनकी लिखी हम्द, नात ए पाक और मर्सियों की खिदमत को अल्लाह ने कुबूल किया और 18, मोहर्रम,11 जुलाई 2025, जुमा के दिन आप दुनिया को अलविदा कह गए । आप अपने पीछे पत्नी दो बेटियों और दो बेटों के साथ बड़े परिवार को छोड़ गए । अल्लाह हाजी अब्दुल शाकिर शेख बुंदेली “परवेज” को जन्नतुल फिरदौस में आला से आला मकाम अता करे । आमीन ।

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