जिला संवाददाता : दिलीप पाटीदार धार
धार। ऐतिहासिक भोजशाला में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ वाग्देवी की पूजा-अर्चना, आरती, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं यज्ञ की पूर्णाहुति का आयोजन किया गया। भोजशाला से जुड़ी समिति के अनुसार, महाराजा भोज की प्राचीन परंपरा को पुनः प्रारंभ करने के उद्देश्य से यह नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को भोजशाला स्थित माँ वाग्देवी के मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती की गई। आयोजन के समापन अवसर पर मुख्य पुजारी ने मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न कराई। इस दौरान शंखनाद, झाँझ-मंजीरों की ध्वनि तथा माँ सरस्वती और राजा भोज के जयकारों से परिसर गूँज उठा।
यज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में समिति के संरक्षक विश्वास पांडे तथा चंद्रवंशीय राजपूत समाज के जतन परमार एवं तेजू दीदी परमार (फाँसी वाली टेकरी) ने आहुति अर्पित की। इस अवसर पर विश्वास पांडे ने अपनी सेवा माँ सरस्वती एवं माँ वाग्देवी को समर्पित करते हुए भोजशाला में माँ वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित करने की मांग दोहराई। उन्होंने सनातन हिंदू समाज की धार्मिक आस्था और माँ वाग्देवी के सम्मान से जुड़े विषय पर सभी से सहयोग का आह्वान किया।
आयोजन में भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, अध्यक्ष सुरेश चंद्र जलोदिया, महाप्रबंधक हेमंत दोराया, संरक्षक अशोक जैन एवं विश्वास पांडे, राजेश शुक्ला, राजाभव भदाने, मोहन राठौर सहित समिति के अन्य सदस्य, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
समिति की ओर से बताया गया कि भोजशाला में प्रत्येक मंगलवार को हनुमान चालीसा पाठ एवं माँ वाग्देवी की आरती की जाती है। साथ ही प्रतिदिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक दर्शन की व्यवस्था होने की जानकारी दी गई।
उक्त जानकारी समिति के मीडिया प्रमुख मोहन राठौर ने दी।





