राजनीतिक एवं सामाजिक जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि.
धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्री
कुक्षी। कुक्षी नगर परिषद की अध्यक्षा एवं भाजपा की वरिष्ठ आदिवासी नेत्री श्रीमती रेलम चौहान को शुक्रवार को हजारों नम आंखों के बीच अंतिम विदाई दी गई।
लंबी बीमारी के बाद गुरुवार, 16 जुलाई 2026 की देर शाम उनके निज निवास पर हुए निधन से पूरे कुक्षी नगर, राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन से क्षेत्र ने एक सरल, संवेदनशील और जनसेवा के लिए समर्पित जनप्रतिनिधि को खो दिया।
शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को प्रातः 11 बजे ग्राम सीदरी से उनकी अंतिम यात्रा प्रारंभ हुई, जो दोपहर लगभग 1 बजे कुक्षी स्थित उनके निवास पहुंची। इसके बाद अंतिम यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों—बस स्टैंड, विजय स्तंभ, सिनेमा चौपाटी, पढ़ावा एवं नगर परिषद कार्यालय से होती हुई कोटेश्वर मुक्तिधाम पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धा, सम्मान एवं भावुकता का वातावरण दिखाई दिया।
अंतिम यात्रा में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, भाजपा प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, कांग्रेस एवं भाजपा के जनप्रतिनिधि, नगर परिषद के पदाधिकारी, पार्षद, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नगरवासियों ने शामिल होकर दिवंगत नेत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।
भाजपा पदाधिकारियों एवं मंडल कार्यकर्ताओं ने उनकी पार्थिव देह पर पार्टी का ध्वज ओढ़ाकर अंतिम सम्मान व्यक्त किया, वहीं नगर परिषद के पार्षदों ने पुष्पमालाएं अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
विजय स्तंभ पर प्रेस क्लब एवं सियाराम संगठन द्वारा श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। अंतिम यात्रा के मार्ग में अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कई स्थानों पर लोगों की आंखें नम थीं और वातावरण पूरी तरह गमगीन बना रहा।
नगर परिषद कार्यालय पहुंचने पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ), परिषद उपाध्यक्ष, पार्षदों एवं कर्मचारियों ने शॉल एवं पुष्पमालाएं अर्पित कर अपनी लोकप्रिय अध्यक्षा को अंतिम प्रणाम किया। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की।
इसके पश्चात अंतिम यात्रा कोटेश्वर मुक्तिधाम पहुंची, जहां परिजनों, समाजजनों एवं शुभचिंतकों की उपस्थिति में पूरे विधि-विधान एवं श्रद्धा के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
श्रीमती रेलम चौहान का निधन केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे कुक्षी क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। जनसेवा, सादगी और लोगों के प्रति उनके आत्मीय व्यवहार की स्मृतियां लंबे समय तक नगरवासियों के हृदय में जीवंत रहेंगी।





