शेख़ नसीम ब्युरो चीफ…
पटना / बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक मुस्लिम डॉक्टर महिला को नियुक्ति-पत्र देते हुए जो शर्मनाक हरकत की है वो हर लिहाज़ से अशोभनीय और निंदायीय है और महिला-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है संवेधानिक पद पर बैठा हुआ एक मुख्यमंत्री भरे मंच से एक मुस्लिम डॉक्टर महिला का हिजाब खींचता है और आसपास खड़े लोग हँस रहे होते है कैसी बे-गैरती शर्मसार करने वाली बात है नीतीश कुमार मुस्लिमो का वोट लेते है और मुस्लिम महिलाओं के पर्सनल कपड़ो को हाथ से खींचते है नीतीश कुमार को ऐसा करते हुए शर्म नही आई क्या सत्ता के अहंकार में अपनी मर्यादा भी भूल गए हो।
जिस व्यक्ति ने आज सार्वजनिक मंच पर एक मुस्लिम महिला के नक़ाब को हाथ लगाकर सरकाया, उसने यह साबित कर दिया कि सत्ता के नशे में इंसान कितना असंवेदनशील और अहंकारी हो सकता है।
यह सिर्फ़ एक महिला का अपमान नहीं था, ये तमाम स्त्री-समाज का अपमान है
यह संविधान, व्यक्तिगत आज़ादी और महिला सम्मान तीनों का खुला उल्लंघन था। क्या अब किसी महिला के पहनावे पर हाथ डालने का अधिकार भी मुख्यमंत्री को मिल गया है
क्या यह वही “सुशासन बाबू” हैं जिनके नाम पर लोग तालियाँ बजाते थे अगर यही व्यवहार किसी आम आदमी ने किया होता तो अब तक गिरफ्तारी हो चुकी होती लेकिन सत्ता में बैठा व्यक्ति अगर ऐसा करे तो उसे “मासूम हरकत” कहा जाएगा
शर्म आनी चाहिए ऐसे नेतृत्व पर
और उससे ज़्यादा शर्म उन लोगों पर जो ऐसे कृत्य पर सार्वजनिक मंच पर खड़े होकर हँस रहे थे और ऐसे लोगो पर जो ऐसे व्यवहार पर भी चुप हैं।






