धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्री
माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ममता जैन के संरक्षण में जिला एवं अपर सत्र न्यायालय कुक्षी में इस वर्ष की तीसरी लोक अदालत का आयोजन किया गया। उक्त नेशनल लोक अदालत में चार खण्डपीठों गठन न्यायालय कुक्षी में किया गया। जिसमें द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश कुमार सोनी, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री धीरज कुमार, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सचिन कुमार जाधव एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हर्ष राज दुबे पीठासीन अधिकारी रहे। उक्त नेशनल लोकअदालत का शुभारंभ द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश कुमार सोनी ने मॉ शरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया। विशेष न्यायाधीश विद्युत कमलेश कुमार सोनी द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में कुल 64 प्रकरणों का निराकरण हुआ। धीरज कुमार प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में कुल 03 प्रकरणों का निराकरण हुआ। सचिन कुमार जाधव अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में कुल 45 प्रकरणों का निराकरण हुआ। हर्ष राज दुबे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के न्यायालय से कुल 73 प्रकरणों का निराकरण हुआ। इस प्रकार कुक्षी न्यायालय से लंबित 185 प्रकरणों का निराकरण आपसी सहमति से हुआ।
कमलेश कुमार सोनी द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कुक्षी के न्यायालय में सिविल अपील का समझौते के आधार पर निराकरण हुआ। वादी अखिलेश जैन ने प्रतिवादी दिलीप कुशवाह के विरूद्ध वर्ष 2023 में मकान के विकय अनुबंध पत्र के आधार पर दावा लगाया था। जिसमें वादी के पक्ष में वाद स्वीकार कर डिकी पारित की गई और 03 लाख 11 हजार राशि अदा करने का आदेश प्रतिवादी को दिया गया। सोनी साहब के न्यायालय में उक्त डिकी के विरूद्ध अपील दिलीप कुशवाह ने की। जैसे ही मामला श्री सोनी के पास आया तो उन्होने दोनों पक्षों को समझाया और लोक अदालत के फायदे समझाये तो दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हो गये और एक समझाईश से दोनों पुराने मित्र फिर एक हो गये।
एक प्रकरण चेक डिसऑनर्स संबंधी अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुक्षी सचिन कुमार जाधव के न्यायालय में काफी समय से लंबित था। अक्षय पाटीदार ने विश्वमंगल देक्टर के मध्य लेन-देन हुआ था जिसमें 30 लाख का चेक विश्वमंगल ट्रेक्टर के द्वारा अक्षय पाटीदार को दिया था। चेक की राशि के भुगतान के लिए बैंक में अक्षय पाटीदार ने अपना चेक लगाया जो बाउंस हो गया।
फिर अक्षय पाटीदार ने न्यायालय में परिवाद लगाया। जिसमें सचिन कुमार जाधव ए.सी.जे.एम. ने दोनों पक्षों को समझाया। परिवादी से कहा कि यदि प्रकरण लोक अदालत में निपटता है तो आपकी संपूर्ण कोर्ट फीस वापिस होगी और उसकी कोई अपील भी नहीं होगी। इस प्रकार दोनों पक्ष समझौता करने हेतु तैयार हो गये और 30 लाख का मामला लोक अदालत के माध्यम से निपट गया।
एक पति-पत्नी के मध्य का मामला हर्ष राज दुबे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुक्षी के न्यायालय में लंबित था। आवेदिका का विवाह अनावेदक से वर्ष 2013 में हुआ था और उनके ससंर्ग से चार बच्चे भी पैदा हुए। किंतु छोटे-छोटे विवादों के चलते दोनों के मध्य झगड़े बढ़ते गए और आवेदिका अपने मायके रहने चली गयी। वर्ष 2025 में आवेदिका ने भरण-पोषण का प्रकरण लगाया। तब दुबे ने पति-पत्नी को लोक अदालत की खण्डपीठ में सुलहकर्ता सदस्य एम.एस. बघेल के साथ समझाया और उन्हें उनके चार बच्चों के भविष्य को लेकर पुनः समझौता कर साथ-साथ रहने और अपने झगड़ो को निपटाने के लिए कहा गया।
दोनों पक्ष समझाने पर मान गए और अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए पुनः साथ रहने सहमत हो गये। जिन्हें न्यायालय से ही साथ-साथ विदा किया गया। उक्त लोक अदालत में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एस.एस. कन्नौज, सचिव दिलीप सोलंकी व कार्यकारणी के सदस्य के साथ ही आर.के. गुप्ता शासकीय अधिवक्ता विद्युत विभाग डी.ई. दिनेश कुमार छिपा, नगर परिषद के सी.एम.ओ. मायाराम सोलंकी, स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के मैनेजर राजेंद्रसिंह ठाकुर, अधिवक्ता अतुल कुमार जैन व न्यायालीयन स्टाफ भी उपस्थित रहा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी





