लोक-शांति भंग करने वालों पर प्रशासन का शिकंजा; झाबुआ सहित पांच पड़ोसी जिलों की सीमाओं से बाहर रहने के आदेश
झाबुआ। जिले में लोक-शांति एवं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की दृष्टि से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नेहा मीना ने सख्त रुख अपनाया है। मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए कलेक्टर ने तीन आदतन अपराधियों को छह माह की अवधि के लिए जिला बदर करने के आदेश जारी किए हैं।
इन तीन अपराधियों पर हुई कार्रवाई
जारी आदेश के अनुसार, निम्नलिखित अनावेदकों को 24 घंटे के भीतर झाबुआ जिला सहित समीपवर्ती जिले धार, रतलाम, आलीराजपुर एवं बड़वानी की राजस्व सीमाओं से बाहर जाना होगा:
- दिनेश पिता सोमजी उर्फ हुमजी भूरिया (निवासी काकनवानी): वर्ष 2016 से सक्रिय इस अपराधी पर मारपीट, अवैध शस्त्र, अवैध शराब और शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
- प्रकाश पिता वरसिंह खराडी (निवासी गुजरपाडा, मेघनगर): साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोपी। इसने वन क्षेत्र में अतिक्रमण कर अवैधानिक गतिविधियों के माध्यम से लोक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया। इस पर गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम के तहत भी प्रकरण दर्ज है।
- प्रमोद उर्फ चिंटू पिता सुरेश राठौर (निवासी तेलीवाड़ा, झाबुआ): सट्टा गतिविधियों का मुख्य संचालक। इसके विरुद्ध पब्लिक गेम्बलिंग एक्ट के 09 मामले दर्ज हैं। इसकी गतिविधियों से आमजन में भय का वातावरण था और पारिवारिक शांति प्रभावित हो रही थी।
24 घंटे में छोड़नी होगी सीमा
कलेक्टर के आदेशानुसार, इन अपराधियों को आदेश प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर निर्धारित जिलों की सीमा से बाहर जाना होगा। अगले छह माह तक सक्षम न्यायालय की लिखित अनुमति के बिना इन क्षेत्रों में इनका प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की चेतावनी
पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर यह कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। कलेक्टर नेहा मीना ने स्पष्ट किया है कि जिले की सुरक्षा और सार्वजनिक शांति से खिलवाड़ करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। असामाजिक तत्वों के विरुद्ध प्रशासन का यह ‘क्लीनअप अभियान’ निरंतर जारी रहेगा।





