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कलेक्टर ने ली झिरन्या एवं भगवानपुरा ब्लॉक के छात्रावास अधीक्षकों की बैठक

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इक़बाल खत्री 

            खरगोन। कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल ने 04 अप्रैल को झिरन्या एवं भगवानपुरा विकासखण्ड के 50 सीटर छात्रावासों के अधीक्षकों एवं इन छात्रावासों पर निगरानी रखने के लिए नियुक्त अन्य विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर छात्रावासों में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक खेमराज सेन भी उपस्थित थे।

छात्रावासों में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो

कलेक्टर सुश्री मित्तल ने बैठक में झिरन्या एवं भगवानपुरा ब्लॉक के प्रत्येक छात्रावास में सीसीटीवी, गीजर, आरओ वॉटर, किचन गार्डन, स्टडी रूम, डायनिंग टेबल, वॉश बेसिन, खिड़कियों में मच्छर जाली, छात्रावास में प्रदाय किये जा रहे पेयजल की टेस्ट रिपोर्ट, मेस के लिए एफएसएसएआई सर्टिफिकेट की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिये कि छात्रावासों में यह सब सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहना चाहिए और इसकी जिम्मेदारी छात्रावास अधीक्षक की रहेगी। 

राशि का दुरूपयोग नहीं किया जाए अन्यथा अधीक्षक पर होगी कड़ी कार्यवाही

कलेक्टर सुश्री मित्तल ने कहा कि छात्रावास अधीक्षकों को 50-50 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस राशि का छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं को जुटाने में उपयोग किया जाए। जहां राशि का दुरूपयोग पाया जाएगा, वहां पर अधीक्षक के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिये कि छात्रावास के सभी बच्चों की अपार आईडी, आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी, आधार कार्ड अनिवार्य रूप से बने होना चाहिए। सभी अधीक्षकों को छात्रावास के बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कलेंडर बनाने के निर्देश दिए गए। जिन छात्रावासों में किचन गार्डन नहीं है वहां पर अनिवार्य रूप से इसे बनाया जाए। 

राशि का दुरूपयोग करने पर अधीक्षक को लगाई फटकार

बैठक में समीक्षा के दौरान पाया गया कि बालक छात्रावास पाडल्या में स्टडी रूम संतोषजनक नहीं है। इस पर मापदण्ड के अनुसार स्टडी रूम बनाने के निर्देश दिए गए। बालक छात्रावास राजपुरा के अधीक्षक राधेश्याम जोहरे द्वारा बताया गया कि 50 हजार रुपये की राशि का उपयोग पलंग क्रय करने में किया गया है। कलेक्टर सुश्री मित्तल ने इस पर नाराजगी जाहिर की और कहा कि पलंग के लिए अलग से राशि प्रदाय की जाती है। उन्होंने राजपुरा के छात्रावास अधीक्षक द्वारा खर्च की गई 50 हजार रुपये की राशि की जांच कराने के निर्देश दिये। आदिवासी बालक आश्रम काकोड़ा में अंग्रेजी और गणित के शिक्षक नहीं होना बताया गया। इस पर छात्रावास अधीक्षक बाथू सोलंकी को सख्त निर्देश दिये गए कि इन विषयों के लिए अतिथि शिक्षक की व्यवस्था करें, अन्यथा उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। 

कोटबेड़ा में बने आश्रम भवन की जांच करने के निर्देश

समीक्षा के दौरान बताया गया कि कन्या आश्रम कोटबेड़ा का 03 वर्ष पूर्व बने भवन का उपयोग नहीं हो रहा है। इस भवन की छत टपक रही है। इस पर कलेक्टर सुश्री मित्तल ने आदिवासी विकास विभाग के इंजीनियर से भवन की जांच कराने और गुणवत्ताहीन कार्य के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्यवाही प्रस्तावित करने के निर्देश दिए। कन्या आश्रम करान्या की नई अधीक्षिका को छात्रावास अधीक्षिका का प्रभार नहीं मिलने की जानकारी सामने आने पर कलेक्टर ने शीघ्र प्रभार दिलाने के निर्देश दिये। इस छात्रावास में फ्रिज किसी फर्म या संस्था से दान करवाने के निर्देश दिये गए। विमुक्त जाति छात्रावास में गीजर एवं सीसीटीवी कैमरा शीघ्र लगवाने के निर्देश दिये गए। 

कंट्रोल रूम का फोन नहीं उठाने पर अधीक्षक पर होगी कार्यवाही

कलेक्टर सुश्री मित्तल द्वारा छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर निगरानी रखने के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। बैठक में यह जानकारी सामने आयी कि कंट्रोल रूम से अधीक्षकों को फोन लगाने पर वे फोन नहीं उठाते हैं या उनके फोन बंद बताते हैं। कलेक्टर सुश्री मित्तल ने कंट्रोल रूम का फोन नहीं उठाने वाले अधीक्षकों को फटकार लगाई और चेतावनी दी कि भविष्य में इसकी पुनरावृती न हो। अन्यथा उनके विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर सुश्री मित्तल ने छात्रावासों की निगरानी के लिए नियुक्त अन्य विभागों के अधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिये कि वे नियमित अंतराल पर छात्रावासों का निरीक्षण करें और वहां की व्यवस्थाओं संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

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