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कांग्रेस का चिंतन बैठक पर तंज: कमलनाथ बोले- पचमढ़ी इवेंट में सिर्फ कोरोना काल में बंद योजनाए शुरू की

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पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि शिवराज की कैबिनेट की चिंतन बैठक इवेंट, पर्यटन होने की उम्मीद के अनुसार ही रही। प्रदेश की जनता की भलाई के लिए कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। कार्ययोजना, जनहितैषी निर्णय, ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कुछ सामने नहीं आया।
कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सरकार अपनी कैबिनेट बैठक पचमढ़ी में करें या किसी भी पर्यटन स्थल पर करें ,प्रदेश में करें ,प्रदेश के बाहर करें ,हमें इससे कोई फर्क नहीं और ना ही हमारा इसको लेकर कभी कोई विरोध है। हमारा तो बस इतना कहना है कि अभी तक कि इस तरह की बैठकों से प्रदेश व प्रदेश वासियों को क्या लाभ हुआ और वर्तमान की इस बैठक से प्रदेश और प्रदेशवासियों को क्या फायदा हुआ ,यह शिवराज सरकार को बताना चाहिए। उन्हें यह भी बताना चाहिये ऐसे कौन से निर्णय पचमढ़ी में लिये गए जो भोपाल में नही लिये जा सकते थे।
कमलनाथ ने कहा कि बैठक के पूर्व दावे तो बड़े बड़े किए गए, लेकिन बैठक में सिर्फ आगामी चुनाव को देखते हुए झूठी घोषणाओं के दम पर जनता को गुमराह करने जरूर चिंतन मंथन हुआ है।  
15 वर्ष के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रदेश में 17 वर्षों से सरकार है। वह इस बैठक के बाद भी कह रहे हैं कि हमने इस बैठक में कई बातों पर विचार किया है, उसे हम बाद में अंतिम रूप देंगे, उसके लिए आर्थिक व्यवस्था करेंगे ,उसमें अभी समय लगेगा, उसके लिए चिंतन मंथन और विचार करेंगे।
पूर्व सीएम ने कहा कि बड़े आश्चर्य की बात है कि इस चिंतन-मंथन बैठक में जो बाते निकल कर आई, वह पुरानी योजनाओं की आई। कोरोना काल में बंद पड़ी योजना को दोबारा चालू करने का निर्णय बैठक में लिया गया।
हमारी सरकार ने कन्या विवाह की राशि को 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार किया था, जिस योजना में शिवराज सरकार में नित नए घोटाले सामने आ रहे हैं। उसमें 4 हजार की राशि बढ़ाई गई है और उसका निर्णय भी पचमढ़ी जाकर लिया गया है।
कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश की जनता जानती है कि शिवराज सरकार इवेंट, आयोजन, उत्सव प्रेमी है। प्रदेश के सरकारी खजाने को उत्सव, आयोजन, इवेंट के नाम पर कैसे लूटाया जाए। इसकी योजना शिवराज सरकार समय-समय पर बनाती रहती  है। चिंतन-मंथन बैठक के बाद भी प्रदेश में आगामी समय में होने वाले कई आयोजन और उत्सवों की घोषणा की गई ,जिनके नाम पर सरकारी खजाने को जमकर लूटाया जाएगा और प्रदेश जो पहले से ही तीन लाख करोड़ के कर्ज के दलदल में जा चुका है , उसे और कर्ज के दलदल में धकेला जाएगा।
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