मध्यप्रदेश के प्रथम समाजसेवी खेल जगत से लेकर स्थापित की पहचान…
शेख़ नसीम। भोपाल। मध्यप्रदेश के जाने-माने वरिष्ठ समाजसेवी मकबूल दयावान ने अपने समर्पण, लगन और निस्वार्थ सेवा के बल पर समाज में एक अलग पहचान स्थापित की है। पिछले कई वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय दयावान ने अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उनके सामाजिक योगदान को देखते हुए शासन-प्रशासन के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने भी उन्हें प्रशंसा पत्र और सम्मान प्रदान किए हैं। समाजसेवा के साथ-साथ उन्होंने खेल जगत, विशेषकर बॉडीबिल्डिंग में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
मकबूल दयावान के सामाजिक कार्यों में भिक्षावृत्ति में फंसे 44 बच्चों को रेस्क्यू कराने का कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसके अलावा भोपाल में भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने जरूरतमंदों की मदद करने और समाज के कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी उठाई आवाज
मकबूल दयावान ने छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा और मध्यप्रदेश के बालाघाट सहित नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर आदिवासी एवं जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझने और उनके हितों की आवाज बुलंद करने का प्रयास किया है। इन क्षेत्रों में उनके सामाजिक कार्यों के दौरान स्थानीय आदिवासी समुदायों द्वारा पारंपरिक नृत्य, गीत और ढोल के साथ उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया जाता रहा है।
उनका प्रयास रहा है कि आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को सामने लाया जाए और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
बॉडीबिल्डिंग में भी हासिल की उपलब्धियां
समाजसेवा के साथ मकबूल दयावान खेल जगत में भी एक जाना-पहचाना नाम हैं। बॉडीबिल्डिंग के क्षेत्र में उन्होंने जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है। उन्हें खेल और समाजसेवा के क्षेत्र में विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे इंडिया (UIBBF) बॉडीबिल्डिंग एसोसिएशन में आधिकारिक पद पर कार्यरत हैं।
पुलिस अधिकारियों और मेधावी विद्यार्थियों का करते हैं सम्मान
मकबूल दयावान अपनी संस्था के माध्यम से समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने का भी कार्य करते हैं। वे अब तक 100 उत्कृष्ट पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित कर चुके हैं। इसके साथ ही आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाते रहे हैं।
समाज में मानवता और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वे दूसरों की जान बचाने वाले लोगों को जीवन रक्षा पुरस्कार से सम्मानित करते हैं। उनका मानना है कि समाज के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोगों और जरूरतमंदों की मदद करने वालों को सम्मानित करने से अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है।
निस्वार्थ सेवा से कायम की मिसाल
मकबूल दयावान की कार्यशैली समाजसेवा, जनहित और खेल के प्रति समर्पण का उदाहरण है। बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने से लेकर आदिवासी समुदायों के हितों की आवाज उठाने, मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करने तक, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है।
उनके प्रयास इस बात को रेखांकित करते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और निस्वार्थ सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।





