शेख़ नसीम। भोपाल / आज सुरों के सम्राट, आवाज़ के जादूगर, शहंशाह-ए-तरन्नुम, गीतों के मसीहा और भारतीय सिनेमा के महानतम,अमर पार्श्वगायक, और दुनिया के सबसे बड़े गायक स्वर्गीय मोहम्मद रफ़ी साहब की 46वीं पुण्यतिथि है।
रफ़ी साहब के बिना भारतीय फिल्म संगीत की कल्पना अधूरी लगती है। उनके गीत आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं। उनकी आवाज़ ने भारतीय संगीत को ऐसी पहचान दी, जो आने वाली पीढ़ियों तक अमर रहेगी।
फिल्मी दुनिया के अनेक बड़े और छोटे सितारों को अपनी आवाज़ देने वाले रफ़ी साहब ने कई अभिनेताओं के करियर को नई ऊँचाइयाँ दीं। दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, राजेन्द्र कुमार, राजकुमार, मनोज कुमार, धर्मेन्द्र, जितेन्द्र, शशि कपूर, ऋषि कपूर, विश्वजीत, जॉय मुखर्जी, देव आनंद, अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, शत्रुघ्न सिन्हा, सुनील दत्त और जॉनी वॉकर जैसे अभिनेताओं पर फिल्माए गए गीतों को उन्होंने अपने अनूठे अंदाज़ से अमर बना दिया।
अपने फिल्मी जीवन में रफ़ी साहब ने हिंदी सहित अनेक भारतीय भाषाओं में हज़ारों गीत गाकर एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने अपने दौर की लगभग सभी प्रमुख गायिकाओं के साथ गीत गाए, जिनमें लता मंगेशकर, आशा भोसले, नूरजहाँ, शमशाद बेगम, सुरैया, मुबारक बेगम, सुमन कल्याणपुर, गीतादत्त, शारदा, सुलक्षणा पंडित, वाणी जयराम और अनुराधा पौडवाल शामिल हैं। लता मंगेशकर के साथ उनके गाए युगल गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद हैं।
रफ़ी साहब अपनी लाजवाब मुस्कान, सादगी, विनम्र स्वभाव और ज़रूरतमंदों की मदद करने की आदत के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने कभी धन को प्राथमिकता नहीं दी। रॉयल्टी को लेकर उनका और लता मंगेशकर का मतभेद भी इसी सोच का परिणाम था। लता जी का मानना था कि गीतों की रॉयल्टी का हिस्सा गायकों को भी मिलना चाहिए, जबकि रफ़ी साहब का कहना था कि एक गायक को अपने गायन का मेहनताना मिल चुका है, इसलिए रॉयल्टी पर उसका अधिकार नहीं होना चाहिए।
आज उनकी 46वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि।
“तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे,
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे,
संग-संग तुम भी गुनगुनाओगे।”





