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UCC के खिलाफ जमीयत उलमा का मोर्चा संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला – मुफ्ती उमर कासमी

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धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्री

मप्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति को सौंपी लिखित आपत्ति |

नागरिकों से ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कराने की अपील

भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता को लेकर जमीयत उलमा ए हिन्द इंदौर संभाग ने कड़ा विरोध दर्ज किया है। संभाग अध्यक्ष मुफ्ती उमर कासमी ने राज्य सरकार की “उच्च स्तरीय समिति – समान नागरिक संहिता” को लिखित आपत्ति सौंपकर UCC को संविधान विरोधी बताया।

आपत्ति पत्र में
मुफ्ती कासमी ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को धर्म पालन की पूरी स्वतंत्रता देता है और अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति की रक्षा का मौलिक अधिकार देता है। UCC इन दोनों संवैधानिक गारंटियों के खिलाफ है। उन्होंने याद दिलाया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ को मुस्लिम पर्सनल लॉ शरीयत एप्लीकेशन एक्ट 1937 के तहत संसदीय संरक्षण मिला हुआ है। साथ ही शायरा बानो बनाम भारत संघ 2017 में सर्वोच्च न्यायालय भी पर्सनल लॉ को निजी कानून मान चुका है।

देश की ताकत
मुफ्ती कासमी ने कहा कि भारत की ताकत उसकी अनेकता में एकता है। UCC लागू करना देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर करेगा। जमीयत ने हमेशा संविधान,ल कानून के राज और गंगा-जमुनी तहजीब का समर्थन किया है।

जमीयत की मांगें

  1. मध्य प्रदेश में UCC लागू करने का प्रस्ताव वापस लिया जाए।
  2. सभी धर्मों और आदिवासी समुदायों के पर्सनल लॉ को संवैधानिक संरक्षण दिया जाए।
  3. कानून बनाने से पहले सभी धर्मगुरुओं और हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श हो।

अपील
मुफ्ती कासमी ने प्रदेश के नागरिकों से UCC पर आपत्ति दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने कहा यह आपकी धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल है।

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