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जब शहर सो रहा था, तब मानवता जाग रही थी

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खरगोन जिला ब्यूरो इक़बाल खत्री

मध्यरात्रि में 45 किमी सफर कर हुआ नेत्रदान,
एक निर्णय, किसी की दुनिया रोशन करने वाला बना

खरगोन । 14 मई 2026 को रात्रि लगभग 2:30 बजे, जब पूरा शहर गहरी नींद में था, उसी समय मानवता का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया। ग्राम बालसमूद निवासी चंद्रशेखर जैन की माताजी स्वर्गीय कुसुमबाई जैन के मरणोपरांत उनके पुत्र एवं परिवारजनों ने नेत्रदान का साहसिक और पुण्य निर्णय लिया।
नेत्रदान की सूचना मिलते ही जिला चिकित्सालय, खरगोन के नेत्र विभाग की टीम ने तत्परता दिखाते हुए मध्यरात्रि में खरगोन से बालसमूद तक 45 किलोमीटर का सफर तय कर नेत्र संकलन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। यह कार्य उस समय हुआ, जब सामान्य जनजीवन विश्राम की अवस्था में था, लेकिन सेवा और संवेदनशीलता जाग्रत थी।

इस सेवा कार्य में समन्वय एवं मार्गदर्शन सीएचएमओ डॉ. डी.एस. चौहान, सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर सराफ (कसरावद) एवं विजय राठौड़ (कसरावद) द्वारा सराहनीय सहयोग प्रदान किया गया। तकनीकी सेवा में नेत्र सहायक उदय सिंह राठौड़ एवं दीनानाथ गुप्ता, जिला चिकित्सालय खरगोन ने पूर्ण समर्पण भाव से अपनी भूमिका निभाई।
यह प्रेरक घटना इस बात का जीवंत उदाहरण है कि नेत्रदान महादान है। एक परिवार का संवेदनशील निर्णय किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी भर सकता है। जब दुनिया विश्राम कर रही थी, तब यह सेवा टीम मानवता के दीप को जलाने, किसी की आँखों में उजाला भरने के लिए निकल पड़ी।

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