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शासकीय लकड़ी कौड़ियों के दाम: टोंकखुर्द एसडीएम ने नीलामी पर लगाई रोक, कलेक्टर एवं डी एफ ओ को लिखा पत्र

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टोंक खुर्द इस्लाम पटेल

​टोंकखुर्द। विकास के नाम पर दी जाने वाली बलि अब भ्रष्टाचार या लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। मक्सी फोरलेन चौड़ीकरण के मार्ग में आने वाले 174 बेशकीमती वृक्षों की नीलामी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शासन के मूल्यांकन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


​क्या है पूरा मामला?
​ग्राम डीगरादा एवं दौनता जागीर में सड़क चौड़ीकरण के लिए काटे जाने वाले 174 वृक्षों की कीमत मात्र 85,848 रुपये आंकी गई है। आज के दौर में जहां बाजार में सूखी लकड़ी का भाव भी 6 से 7 रुपये प्रति किलो है, वहां जीवित और भारी-भरकम वृक्षों का इतना कम मूल्यांकन चौंकाने वाला है।


​एसडीएम की सक्रियता: नीलामी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
​मुख्य अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) टोंकखुर्द ने इस विसंगति को भांपते हुए तत्काल कलेक्टर महोदय को पत्र लिखकर नीलामी प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया गया है:


​कम मूल्यांकन: बाजार भाव की तुलना में वृक्षों की सरकारी कीमत बेहद कम लगाई गई है, जिससे शासन को भारी राजस्व हानि होने की संभावना है।


​प्रचार-प्रसार का अभाव: नीलामी की जानकारी सार्वजनिक न होने के कारण अब तक केवल 3 व्यापारी ही सामने आए हैं।
​पारदर्शिता की कमी: सही ढंग से विज्ञापन न होने के कारण प्रतिस्पर्धा नहीं हो पा रही है।


​कड़े निर्देश: अब होगी वीडियो रिकॉर्डिंग और पुनर्मूल्यांकन
​एसडीएम ने इस पूरे मामले में नायब तहसीलदार चिड़ावद को निर्देशित किया है कि:
​पुनः परीक्षण: वन विभाग के साथ मिलकर वृक्षों के मूल्य का दोबारा सटीक आकलन किया जाए।
​व्यापक प्रचार: दो लोकप्रिय दैनिक समाचार पत्रों में नीलामी की नई विज्ञप्ति जारी की जाए।


​मुनादी: ग्राम स्तर पर कोटवार के माध्यम से ‘डुंडी’ पिटवाकर ग्रामीणों और व्यापारियों को सूचित किया जाए।
​वीडियो रिकॉर्डिंग: नीलामी की पूरी प्रक्रिया की वीडियो ग्राफी अनिवार्य रूप से की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।


​”शासन की संपत्ति को कौड़ियों के दाम नहीं बिकने दिया जाएगा। जब तक सही मूल्यांकन और पर्याप्त प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित नहीं होती, नीलामी की प्रक्रिया को नियमानुसार आगे बढ़ाया जाएगा।” > — अनुविभागीय अधिकारी, टोंकखुर्द
​इस कदम से स्पष्ट है कि प्रशासन अब शासकीय संपत्तियों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। अब देखना यह होगा कि पुनर्मूल्यांकन के बाद इन 174 वृक्षों की असली कीमत क्या निकलकर आती है।

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