अंधेरी सड़कें और बेखौफ मनचले: बिना हेलमेट ‘डबल सवारी’ कर रहे जानलेवा करतब; पुलिस की चेकिंग सिर्फ खानापूर्ति!भोपाल | झीलों की नगरी भोपाल की मुख्य सड़कें इन दिनों सुरक्षित सफर का रास्ता नहीं, बल्कि हादसों का ‘खूनी मैदान’ बनती जा रही हैं।
शहर के वीआईपी रोड, लिंक रोड और होशंगाबाद रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर स्टंटबाज़ों का ऐसा आतंक है कि राहगीर अब सड़कों पर निकलने से कतराने लगे हैं। विडंबना यह है कि ये मनचले न केवल अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि सड़क पर चल रहे मासूम लोगों की जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
अंधेरे का फायदा: बंद स्ट्रीट लाइटें दे रही हादसों को न्योता
शहर की कई मुख्य सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। रात के इसी अंधेरे का फायदा उठाकर स्टंटबाज़ अपनी अनियंत्रित मोटरसाइकिलों पर मौत का खेल खेलते हैं। अंधेरा होने के कारण सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालक और पैदल लोग इन स्टंटबाजों को वक्त रहते देख नहीं पाते, जिससे भीषण टक्कर और मौत का खतरा हर पल बना रहता है।
खटारा गाड़ियाँ, फिर भी ‘हवा से बातें’
हैरानी की बात यह है कि इन स्टंटबाजों की मोटरसाइकिलों की हालत बेहद जर्जर और असुरक्षित है। बिना हेलमेट, बिना सुरक्षा उपकरणों के ये युवा ‘डबल सवारी’ बैठकर ऐसे करतब दिखाते हैं जैसे सड़क नहीं कोई रेसिंग ट्रैक हो। इन गाड़ियों का संतुलन कभी भी बिगड़ सकता है, जो किसी भी राहगीर को अपनी चपेट में लेने के लिए काफी है।
सवालों के घेरे में खाकी: आखिर किसके शह पर बेखौफ हैं ये युवक?
पुलिस प्रशासन द्वारा जगह-जगह चेकिंग पॉइंट तो बनाए गए हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह चेकिंग सिर्फ दिखावे की है? पुलिस की नाक के नीचे ये स्टंटबाज़ नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए निकल जाते हैं। आखिर इन पर ऐसी ठोस कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं होती जो दूसरों के लिए नजीर बन सके? क्या पुलिस और प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या किसी मासूम की मौत का इंतज़ार कर रहे हैं?
‘जनसम्पर्क खबर’ का सवाल: एक तरफ बंद लाइटें और दूसरी तरफ लचर पुलिस व्यवस्था—यह जानलेवा तालमेल अब भोपाल की पहचान बनता जा रहा है। वक्त आ गया है कि प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे, इससे पहले कि ये सड़कें किसी और हँसते-खेलते परिवार के चिराग को बुझा दें।
इन्वेस्टिगेशन हाइलाइट्स:
दहशत: अंधेरी सड़कों पर स्ट्रीट लाइट बंद होने से बढ़ा खतरा।
लापरवाही: बिना हेलमेट और जर्जर गाड़ियों पर जानलेवा स्टंट।
नाकामी: चेकिंग पॉइंट्स के बावजूद पुलिस की पकड़ से दूर मनचले।
खतरा: राहगीरों और बुजुर्गों का सड़क पर चलना हुआ दूभर।





