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किसान आंदोलन: खलघाट जा रहे निमाड़-मालवा के किसानों को कसरावद में रोका, चक्का जाम

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संवाददाता: सलीम खान

कसरावद (खरगोन)। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के नेतृत्व में धार जिले के खलघाट टोल प्लाजा पर आयोजित हो रहे महा आंदोलन में शामिल होने जा रहे निमाड़ और मालवा क्षेत्र के किसानों को पुलिस प्रशासन ने कसरावद के पैरामाउंट स्कूल के पास रोक दिया। किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के प्रशासन के इस कदम के विरोध में आक्रोशित किसानों ने सड़क पर ही चक्का जाम कर दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई।

पुलिस ने रोका काफिला

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ द्वारा आयोजित इस बड़े आंदोलन में खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सहित चार जिलों के बड़ी संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर खलघाट पहुँच रहे हैं। जैसे ही किसानों का काफिला कसरावद के पैरामाउंट स्कूल के पास पहुँचा, वहाँ पहले से तैनात पुलिस और प्रशासनिक बल ने उन्हें बैरिकेड लगाकर रोक दिया।

किसानों ने लगाया जबरन रोकने का आरोप

रोके जाने के बाद किसानों में गहरा रोष देखा गया। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन में शामिल होने जा रहे हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन उन्हें जबरन रोक रहा है।

किसान मुकेश पाटीदार (बाइट) ने अपनी बात रखते हुए कहा, “हमारी कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से लंबित हैं। हम अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन में जा रहे हैं, फिर भी प्रशासन हमें रोक रहा है। यह किसानों की आवाज़ दबाने का प्रयास है, जिसे हम सफल नहीं होने देंगे।”

किसानों ने तत्काल सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया और चक्का जाम कर दिया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

प्रमुख मांगें लेकर किसान एकजुट

महासंघ के नेतृत्व में हो रहे इस आंदोलन का उद्देश्य विभिन्न लंबित महत्वपूर्ण मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है, जिन पर किसानों का कहना है कि सरकार को जल्द ही ठोस कदम उठाना चाहिए। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए, निमाड़-मालवा क्षेत्र के किसान रात में ही ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों से खलघाट के लिए रवाना हो रहे थे, जिससे पूरे क्षेत्र में हलचल बनी हुई है।

प्रशासन अलर्ट मोड पर

इधर, पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कसरावद और खलघाट के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारी लगातार स्थिति पर नज़र रख रहे हैं और प्रयास कर रहे हैं कि आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके और कानून व्यवस्था बनी रहे। हालांकि, कसरावद में किसानों द्वारा किया गया चक्का जाम प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि चक्का जाम के बाद पुलिस प्रशासन किसानों को आगे बढ़ने की अनुमति देता है या नहीं, और सरकार किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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