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क्रिप्टो घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी से कहा- हम जिला अदालत नहीं हैं जहां आप आदेशों के साथ खेल सकते हैं

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सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों क्रिप्टोकरेंसी घोटाले के एक आरोपी को आदेश दिया था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साथ अपना यूजरनेम और पासवर्ड साझा करें। लेकिन, आरोपी ने ऐसा नहीं किया। इस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से संज्ञान लिया और कहा कि हम कोई जिला अदालत नहीं हैं जहां आप आदेशों के साथ खेल सकते हैं। 
न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने आरोपी को चेतावनी दी कि अगर उसने अदालत के पूर्व के आदेशों का पालन नहीं किया तो हम उसके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने याचिका को खारिज कर देंगे। आरोपी अजय भारद्वाज की ओर से वकील पीसी सेन और ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिटिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी पेश हुई थीं। 
पीठ ने सेन से पूछा कि हमारे पिछले आदेश के अनुसार आपने अभी तक यूजरनेम और पासवर्ड साझा क्यों नहीं किए हैं? हम आपकी रिट याचिका खारिज कर देंगे अगर आपने आदेशों का पालन नहीं किया। पीठ ने कहा, आपने खुद कहा था कि आप ये जानकारी साझा करेंगे, लेकिन अब आप आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, यह तीस हजारी अदालत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने सेन से कहा कि वह भारद्वाज को यह जानकारी दे दें कि उन्हें ईडी के साथ जानकारियां साझा करनी होंगी और उसके बाद ही अदालत उनकी बात सुनेगी। वहीं, ईडी की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्य भाटी ने कहा कि आरोपी एजेंसी के साथ सहयोग नहीं कर रहा है और उसने संबंधित जानकारी भी साझा नहीं की है।
आरोपी की ओर से पीठ के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे भी पेश हुए। उन्होंने कहा कि पुणे पुलिस ने दो क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट के साथ सभी संबंधित दस्तावेज और ईमेल आईडी व पासवर्ड जब्त किए थे। भारद्वाज ईडी के साथ यूजर आईडी और पासवर्ड साझा करने से बच नहीं रहा है लेकिन यह काम उसके वकील के सामने किया जाना चाहिए।
28 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टो घोटाले के एक आरोपी अजय भारद्वाज से अपने बिटकॉइन वॉलेट का यूजरनेम और पासवर्ड ईडी के साथ शाझा करने और उसके खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच में सहयोग करने के लिए कहा था।  25 फरवरी को कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि क्रिप्टोकरेंसी व्यापार की देश में वैधता को लेकर उसका रुख क्या है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) (रेरा) अधिनियम 2016 के नियम लागू करने को लेकर केंद्र के सवालों का जवाब देने को कहा है। केंद्र ने मार्च में राज्यों से जानकारी मांगी थी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, केंद्र ने मार्च में सभी राज्यों को पत्र लिखकर उनसे रेरा अधिनियम में बिक्री के नियमों के संबंध में जानकारी मांगी थी। अब तक सिर्फ पांच राज्यों ने ही इसका जवाब दिया है।
सरकार के रेरा कानून के कदम को सुविधाजनक बनाने के लिए हम सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 15 मई या उससे पहले सभी सवालों के जवाब केंद्र को सौंपने का निर्देश देते हैं। पीठ ने साथ ही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और न्यायमित्र देवाशीष भरुका को राज्यों सभी वांछित जानकारी मिलने के बाद स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इस मामले में अब जुलाई के तीसरे हफ्ते में सुनवाई होगी।
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