धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्री
कुक्षी। आज कुक्षी में किसानों के हक़, अधिकारों एवं न्याय की मांग को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। धरना प्रदर्शन के माध्यम से किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए शासन-प्रशासन से किसानों की जायज़ मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित कार्रवाई करने की मांग की गई।
प्रदर्शन में शामिल किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि किसानों के हक़, अधिकारों और न्याय की लड़ाई में हम सभी किसानों के साथ मजबूती से खड़े हैं। किसानों की आवाज़ को बुलंद करना और उनकी जायज़ मांगों को सरकार तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। किसानों की समस्याओं का समय पर समाधान होना चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान और परेशानियों से राहत मिल सके।
धरना प्रदर्शन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे एवं मांगें
डही माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना एवं कुक्षी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना: इन सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों तथा मेघनाथ घाट से संबंधित समस्याओं पर उचित कार्रवाई कर किसानों को राहत प्रदान की जाए।
सूखे की स्थिति का निष्पक्ष आकलन: क्षेत्र में वर्षा की कमी, फसलों की वर्तमान स्थिति, मिट्टी में नमी, भूजल स्तर एवं जलाशयों में उपलब्ध पानी के आधार पर सक्षम अधिकारियों की टीम द्वारा सूखे की स्थिति का निष्पक्ष आकलन कराया जाए।
प्रभावित क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग: निर्धारित मानदंड पूरे होने पर प्रभावित क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए तथा किसानों को नियमानुसार राहत प्रदान की जाए।
विशेष राहत पैकेज स्वीकृत किया जाए: फसल नुकसान एवं सूखे से प्रभावित किसानों को लागू आपदा राहत प्रावधानों के अंतर्गत उचित आर्थिक सहायता और विशेष राहत पैकेज उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके।
किसानों के हितों के लिए संघर्ष जारी रहेगा
धरना प्रदर्शन के माध्यम से किसानों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने तथा उनके हक़ और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प व्यक्त किया गया। किसानों की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें न्याय दिलाना जनहित में आवश्यक है।
धरना प्रदर्शन में जनहित संघर्ष समिति के अध्यक्ष महिमाराम पाटीदार, अंतिम मुझाल्दा (जयस प्रदेश अध्यक्ष मध्यप्रदेश), योगेश पाटीदार, रामेश्वर पाटीदार, गेंदालाल रणदा, हीरा मोदी, वालिया तेलिया, हरि गडरिया, सुनील कुशवाहा, गेंदालाल पाटीदार, संदीप बामनिया, रमेश टेगोर, सुरेश भाबार सहित अन्य किसान एवं किसान प्रतिनिधि शामिल हुए।





