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अमझेरा में गूंजेगी श्रीकृष्ण की बांसुरी – लीला, लोक और भक्ति से सजेंगी दो सांझ।

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जिला संवाददाता : दिलीप पाटीदार अमझेरा ( धार )

संस्‍कृति विभाग द्वारा सम्‍पूर्ण मध्‍यप्रदेश में किया जा रहा श्रीकृष्‍ण पर्व, सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना उद्देश्‍य।

अमझेरा। श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास, मध्‍यप्रदेश शासन, संस्‍कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन – धार के सहयोग से जन्‍माष्‍टमी के पावन अवसर पर सम्‍पूर्ण मध्‍यप्रदेश में ‘श्रीकृष्‍ण पर्व’ का भव्‍य एवं दिव्‍य आयोजन किया जा रहा है। मध्‍यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्‍ण की सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में 3 एवं 4 सितम्‍बर, 2026 को सायं 7 बजे से थाना परिसर के पीछे, अमझेरा (धार) में ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्‍क रहेगा।
संचालक, संस्‍कृति श्री एन.पी. नामदेव ने बताया कि अमझेरा को भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी हरण से जुड़े पौराणिक प्रसंग का साक्षी माना जाता है। मान्यता है कि रुक्मिणी को शिशुपाल से विवाह से बचाने के लिए श्रीकृष्ण उन्हें अमझेरा से लेकर द्वारका की ओर चले थे। रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने श्रीकृष्ण का पीछा किया और दोनों के बीच युद्ध हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण ने रुक्मी को पराजित किया। यही वह कथा-भूमि है, जहां कृष्ण का प्रेम, पराक्रम और लोकजीवन एक साथ दिखाई देते हैं। अमझेरा के प्राचीन मंदिर, तालाब, छतरियां, कुएं और किला इस क्षेत्र की ऐतिहासिक समृद्धि की कहानी कहते हैं।

3 सितंबर, 2026 : कृष्ण-लीला और भक्ति के रंग।

श्रीकृष्ण पर्व के पहले दिन ‘श्रीकृष्ण लीला’ नृत्य नाटिका की प्रस्तुति श्री हर्षित शर्मा एवं साथी, भोपाल द्वारा की जाएगी। मंच पर कृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं के प्रसंग नृत्य, अभिनय और संगीत के माध्यम से जीवंत होंगे। इसके बाद सुविख्‍यात गायक शर्मा बंधु एवं साथी, उज्जैन की भक्ति गायन प्रस्तुति कृष्ण-भक्ति के सुरों से वातावरण को सराबोर करेगी। लोक एवं शास्त्रीय भावों से जुड़ी इन स्वर-लहरियों में श्रोताओं को श्रीकृष्ण के उस रूप का अनुभव होगा, जो कभी नटखट कान्हा है, कभी प्रेम का प्रतीक और कभी धर्म की रक्षा के लिए खड़ा योद्धा।

4 सितंबर, 2026 : रुक्मिणी हरण से कृष्ण-रुक्मिणी विवाह तक।

दूसरे दिन ‘रुक्मिणी हरण एवं विवाह’ प्रसंग पर केंद्रित नृत्य नाटिका सुश्री दुर्गा मिश्रा एवं साथी, भोपाल द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। कृष्ण और रुक्मिणी की प्रेम-कथा का यह प्रसंग केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि प्रेम, साहस और अपने निर्णय पर अडिग रहने की कथा भी है। वहीं, सुश्री आकृति सोनी एवं साथी, इंदौर की भक्ति गायन प्रस्तुति इस सांस्कृतिक संध्या को भक्ति के माधुर्य से पूर्ण करेगी।

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