रियान कंपनी की घोर लापरवाही से नगरवासी आक्रोशित; अच्छी-भली सड़कों को किया जर्जर, सीएमओ ने दी नोटिस की चेतावनी कसरावद खरगोन |
संवाददाता : सलिम खान
खरगोन जिले के कसरावद नगर में पेयजल सुविधा बेहतर करने के उद्देश्य से शुरू की गई नल-जल योजना अब नगरवासियों के लिए भारी मुसीबत बन चुकी है। निर्माण कार्य में लगी ‘रियान कंपनी’ द्वारा जगह-जगह सड़कों को खोदकर गड्ढों को खुला छोड़ दिया गया है, जिससे हर पल गंभीर दुर्घटना का अंदेशा बना हुआ है। तय समयावधि पूरी हो जाने के बाद भी आज तक पूरे नगर में पाइपलाइन चालू नहीं हो सकी है।
सड़कों का कबाड़ा, सुरक्षा के इंतजाम शून्यआरोप है कि रियान कंपनी के कर्मचारियों द्वारा पाइपलाइन बिछाने के नाम पर मंडलेश्वर रोड, बड़ी माता मंदिर के पास और मुख्य मार्गों की अच्छी-भली सड़कों को खोदकर जर्जर कर दिया गया है। कार्य पूरा होने के बाद न तो गड्ढों को भरा जा रहा है और न ही वहाँ कोई सुरक्षा संकेत लगाए गए हैं। रात के अंधेरे में ये 3 से 4 फीट गहरे खुले गड्ढे राहगीरों, स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए ‘मौत का कुआं’ साबित हो रहे हैं।स्थानीय निवासी राजेश पटेल का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से मुख्य सड़कों के दोनों तरफ गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं। कंपनी के लोग पाइप डालकर चले जाते हैं, लेकिन गड्ढों को ढंकने की जहमत नहीं उठाते। कई बुजुर्ग और बच्चे गिरते-गिरते बचे हैं।
- नागरिकों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
- आक्रोशित नागरिकों ने नगर परिषद और संबंधित विभाग से मांग की है।
- खुदाई वाले स्थानों पर तुरंत बैरिकेड, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
- पाइपलाइन डालते ही 24 घंटे के अंदर गड्ढों की पक्की फिलिंग कराई जाए।
- तय समयसीमा में काम पूरा न करने पर कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हो।
जिम्मेदारों के बोल:
कंपनी का रवैया ढुलमुल: इस संबंध में जब रियान कंपनी के साइट इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।
कमलेश गोले सीएमओ, नगर परिषद कसरावद : “मामला संज्ञान में आया है। संबंधित ठेकेदार को तुरंत नोटिस जारी कर खुले गड्ढे भरने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। यदि लापरवाही जारी रही तो कंपनी पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।”
‘जनसम्पर्क ख़बर’ का नजरिया
नल-जल योजना जनता को सहूलियत देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही और सुस्त रवैये से यह योजना जन-मुसीबत बन गई है। विकास कार्यों के साथ नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि समयसीमा बीतने के बावजूद काम अटकाने वाली कंपनी पर कड़ी कार्रवाई करे ताकि नगरवासियों को जल्द राहत मिल सके।






