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हिमगिरि लांघा तो क्या? अभिमान न लांघ सका – मीत सब छुटे – पण्डित शर्मा

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धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्रीकुक्षी

शारदा सृजन मंडल द्वारा माह के प्रथम सप्ताह में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित काव्य गोष्ठी में साहित्यविद पण्डित कैलाशचंद्र शर्मा ने हिमगिरि लांघा तो क्या ? अभिमान न लांघ सका – मीत सब छुटे काव्य पाठ के साथ गोष्ठी में वर्तमान मानव आचरण पर कटाक्ष किया । आपने प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी से युद्धरत ठहराते हुए पंक्तियां पढ़ी कि कौन जीतेगा समर में , युद्ध के बदलते हुए हथियार हर दिन। इस अवसर पर संचालन करते हुए शालिग्राम सोनी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की ।

शारदा मन्दिर वाचनालय में आयोजित इस काव्य गोष्ठी में गिरधर सोनी ने पर्यावरण का चित्र उकेरते हुए वृक्षों का धरती पर लिबास रहने दो -काटो मत पेड़ो को इनको जीवनभर रहने दो कविता पढ़ी । भूपेन्द्र वर्मा ने अनुशासन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मुझको मेरा सुना आंगन याद आया, बचपन का वह सुहाना समय बहुत था भाया कविता पढ़ी । मनोज साधु ने जिसमें सब अवगुण बहे , वह उनाव मांगूं मैं । स्नेह और सद्गुण रहे वह ठहराव मांगूं मैं । जिसमें मिले सुख शांति वह गाँव मांगू मैं , है बुरी कुछ प्रथाएं बदलाव मांगू मैं से सामाजिक समरसता को प्रस्तुत किया । मनीष भावसार ने जनसंख्या वृद्धि पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कविता पढ़ी । एडवोकेट राजेन्द्र गुप्ता ने उम्र बढ़ती जा रही तुम बड़े होते नहीं कविता पढ़ी । प्रशांत कौशल वर्मा ने वो पिता जान थे जान ही रहेंगे , मेरी जीत में मेरी हार में साथ थे साथ ही रहेंगे कविता पढ़ी । डॉ. अजीज लक्की ने पतझड़ के आ जाने से , शालिग्राम सोनी ने भ्रष्टाचार पर , नीलेश मोदी ने जग़मग जगमग रोशनी कविता पढ़ी ।

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