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सेवा और समर्पण की मिसाल जाबिर भाई अलीराजपुर वाला नहीं रहें ।

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बिलाल खत्री

अलीराजपुर । जिले के ख्यातनाम व्यक्तित के धनी जाबिर हुसैन अलीराजपुरवाला 1993-94 के दौर की बात है । जब शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज के अकाउंटेंट जाबिर भाई अलीराजपुर वाला झाबुआ से स्थांतरित होकर इंदौर आएं थे। अलीराजपुर, झाबुआ में आपके सटीक अकाउंट और आम आदमी के काम के लिए हमेशा तत्पर व सादगीपूर्ण व्यक्तित्व ने आपको मक़बूलियत पर पहुंचा दिया । इंदौर में आकर उन्होंने समाज के इमली बाजार स्थित कब्रिस्तान के अकाउंट का कार्य देखना शुरू किया। 

इकतीस वर्ष तक जाबिर भाई ने इमली बाजार कब्रिस्तान के अकाउंट का कार्य निष्ठा और ईमानदारी से किया। अस्सी वर्ष की उम्र में भी उनका सेवा का जज्बा युवाओं को मात देता था।इंदौर जैसे शहर में समाज में कोई गमी होती थी और उन्हें याद किया तो वो हाजिर रहते थे। सुख में तो सब शामिल होते हैं दुःख में जो खड़ा रहें वहीं इंसानियत हैं। इसी ध्येय वाक्य को मूल मंत्र मानकर आप निःस्वार्थ खिदमत में लगे रहते थे। 2002 में 52 वें धर्मगुरु डॉ सय्यदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन मौला अशरा मुबारक के लिए इंदौर तशरीफ़ लाए थे तो अपने प्रवास के दौरान इमली बाजार स्थित बेन साहब पर आएं थे । उस वक्त जन्नत नशीं बुरहानुद्दीन मौला की तलक्की का शरफ उन्हें मिला था।

शनिवार को आपका इंतकाल हुआ उस दिन भी आप सवेरे अकाउंट का कार्य देख कर आएं थे। रात्रि में आपको हार्ट अटेक आने से इंतकाल हो गया। आपके आखरी सफर में बड़ी संख्या में समाज के साथ साथ अन्य समाजियों ने हिस्सा लेकर नम आंखों से आपकी सेवा और जज्बे को याद किया, आज इंतकाल के ८_१० दिन बाद भी जैसे जैसे उनके चाहने वालों को ख़बर लग रही है, परिजनों को पुरसे के लिए उनके घर पर दूर दराज से लोग आ रहे हैं ।

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