जिला ब्यूरो इक़बाल खत्री
खरगोन । प्रत्येक मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई की कड़ी में 19 अगस्त को कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह, अपर कलेक्टर श्रीमती रेखा राठौर एवं संयुक्त कलेक्टर श्रीमती हेमलता सोलंकी ने अन्य अधिकारियों के साथ आवेदकों की समस्याओं को सुना और संबंधित अधिकारियों को उनका त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में 52 आवेदक अपनी समस्याएं लेकर आए थे।
जनसुनवाई में कान्हा पिता कालिदास यादव ने क्रांतिसूर्या टंट्या भील विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं मिलने पर आवेदन प्रस्तुत कर समस्या बताई। छात्र कान्हा का कहना है कि आय प्रमाण पत्र संलग्न न होने के कारण उसे विश्वविद्यालय द्वारा सामान्य वर्ग में सम्मिलित कर दिया गया। जिसके कारण विश्वविद्यालय द्वारा जारी प्रवेश सूची में उसका नाम नहीं आया। छात्र कान्हा ने इस समस्या का उचित समाधान करने और प्रवेश दिलाने की मांग करी।
खरगोन जिले की कसरावद तहसील अंतर्गत ग्राम पीपलगोन निवासी सरोज पति स्व. जगदीश जनसुनवाई में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत लेकर आयी थी। सरोज बाई का कहना है कि पंचायत द्वारा फोटो खींचकर उनका नाम सूची में जोड़ लिया गया था, इसके बावजूद आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। सरोज बाई अपने दो बच्चों के साथ कच्चे मकान में रह रही हैं, जहां बरसात के दिनों में पानी टपकने से रहना मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि पति का देहांत हो चुका है और वह मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। सरोज बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
जनसुनवाई में कसरावद तहसील की अमलाथा निवासी 67 वर्षीय नीलाबाई पति नत्थूसिंह वृद्धावस्था पेंशन न मिलने की शिकायत लेकर आयी थी। नीलाबाई का कहना है कि उनकी उम्र अधिक हो चुकी है और पति भी बीमार रहते हैं। आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब होने के कारण वे मजदूरी करने में सक्षम नहीं हैं। उनका कहना है कि शासन की ओर से मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन अब तक उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। नीलाबाई ने कहा कि शीघ्र वृद्धावस्था पेंशन का लाभ दिलाया जाए।
सेगांव तहसील के ग्राम जोजलवाड़ी निवासी सचिन पिता लालसिंह जमरे ने जनसुनवाई में आवेदन देकर अभ्युदय यूनिवर्सिटी से टी.सी. और माइग्रेशन प्रमाणपत्र दिलाने की मांग की। सचिन का कहना है कि उसने बी.एससी. एग्रीकल्चर में प्रथम वर्ष में स्कॉलरशिप के आधार पर प्रवेश लिया था, लेकिन तबीयत खराब होने और परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण आगे परीक्षा नहीं दे पाया। अब विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा टी.सी. एवं माइग्रेशन प्रमाणपत्र नहीं दिया जा रहा है और कहा जा रहा है कि जब तक स्कॉलरशिप की राशि कॉलेज को प्राप्त नहीं होगी, तब तक दस्तावेज नहीं दिए जाएंगे। सचिन ने आगे की पढ़ाई के लिए युनिवर्सीटी से शीघ्र टी.सी. एवं माइग्रेशन दिलाने की मांग की है।






