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लोकमाता अहिल्याबाई: शौर्य, सेवा और संकल्प की सजीव गाथा

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धार ब्यूरो चीफ इकबाल खत्री

महाराजा भोज स्नातकोत्तर महाविद्यालय विक्रम सभागार में हुआ नाटक “लोकमाता अहिल्याबाई – जीवन, अवदान और वैभव का गान” का मंचन

धार। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन धार के संयुक्त तत्वावधान में 11 अगस्त सोमवार को महाराजा भोज स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विक्रम सभागार में नाटक “लोकमाता अहिल्याबाई – जीवन, अवदान और वैभव का गान” का भव्य मंचन हुआ।
गतिविधि का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन एवं कलाकारों के स्वागत से हुआ। इस दौरान इंदौर संभाग प्रभारी, भाजपा राघवेंद्र गौतम एवं नाटक निर्देशक रंजना चितले उपस्थित रहीं। नाटक की अद्वितीय प्रस्तुति ने न केवल दर्शकों को इतिहास के स्वर्णिम पन्नों से रूबरू कराया, बल्कि उन्हें साहस, सेवा और संकल्प की प्रेरणा भी दी। वरिष्ठ लेखिका रंजना चितले द्वारा लिखित, परिकल्पित और निर्देशित इस नाटक ने अहिल्याबाई के जीवन वृतांत को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। नाटक में उनके शौर्य, पराक्रम, अटूट संकल्प, समाज निर्माण के आदर्शों और जनकल्याणकारी कार्यों को बड़े प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।

40 कलाकारों का दल मंच पर एकजुट
नाटक में रचनात्मक सहयोग तानाजी राव का रहा, जबकि संगीत संयोजन श्रुति धर्मेश ने किया। प्रकाश परिकल्पना की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित, संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित कमल जैन द्वारा की गई। 90 मिनट की इस प्रस्तुति में लगभग 40 कलाकारों ने अभिनय कौशल दिखाया।

पोवाड़ा गायन शैली का किया प्रयोग
नाटक की विशेषता रही कि इसमें महाराष्ट्र की पोवाड़ा गायन शैली का प्रयोग किया गया। इस शैली को प्राचीन समय में युद्ध, पराक्रम और वीरता के प्रसंगों को गाने के लिए प्रयोग किया जाता था। पोवाड़ा के लयबद्ध उच्चारण, ढोलक की थाप और स्वर-संगति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। नाटक के कलाकारों ने लोकमाता अहिल्याबाई के दृढ़ निश्चय, न्यायप्रियता और प्रजावत्सल, लोक हितकारी स्वभाव को जीवंत किया।

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