शेख नसीम। भोपाल / गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूल खुल चुके हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर प्रवेश शुल्क, वार्षिक शुल्क, पाठ्यपुस्तकों, कॉपियों, स्कूल ड्रेस, रेनकोट, स्कूल बैग, लंच बॉक्स, पानी की बोतल, कम्पास बॉक्स सहित अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने का आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
कई अभिभावकों का आरोप है कि कुछ निजी स्कूल प्रबंधन उन्हें केवल स्कूल द्वारा निर्धारित विक्रेता या डीलर से ही किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं। उनका कहना है कि यदि वे किसी अन्य दुकान से वही सामग्री खरीदना चाहें तो उन्हें हतोत्साहित किया जाता है। अभिभावकों के अनुसार, ऐसा करने से स्कूल प्रबंधन और निर्धारित विक्रेताओं को अधिक लाभ मिलता है।
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा सेवा का माध्यम होनी चाहिए, न कि व्यवसाय। उनका सवाल है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों के लिए इतनी महंगी शैक्षणिक सामग्री कैसे खरीदें।
उन्होंने जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से इस मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि यदि किसी स्कूल द्वारा नियमों के विरुद्ध अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा हो तो उस पर सख्त कार्रवाई की जा सके और अभिभावकों को अपनी सुविधा के अनुसार किताबें एवं अन्य सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता मिल सके।





